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Showing posts from August, 2026

इमोशंस आप पर हावी या आप इमोशंस पर? Emotions overpower you, or you on your emotions?

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इमोशंस आप पर हावी या आप इमोशंस पर – बेहतर मानसिक स्वास्थ्य के लिए कैसे करें कंट्रोल   किसी बात पर भड़कना, ग़ुस्सा करना, निराश होना, चिंता होना आदि भावनाएं या इमोशंस जीवन का हिस्सा हैं।  अगर इन भावनाओं को काबू में रखा जाए तो तनाव से दूर व खुश रहा जा सकता है और हर काम को सफलतापूर्वक पूरा किया जा सकता है । बेहतर मानसिक स्वास्थ्य के लिए इमोशंस पर कंट्रोल होना आवश्यक है। कई बार इमोशंस हमारे ऊपर इस कदर हावी हो जाते हैं कि हम न तो सही निर्णय ले पाते हैं, न ही कुछ ठीक से सोच-समझ पाते हैं। जल्दबाजी में हम कुछ गलत कर बैठते है और बाद में फिर मानसिक तनाव से गुज़रते है। यह तनाव हमें शारीरिक व मानसिक रूप से बीमार बना सकता है। इस से बचने के लिए यदि हम इमोशंस पर कंट्रोल रख पाए तो इस दौड़भाग वाली लाइफस्टाइल में एक बेहतर मानसिक स्वास्थ्य पा सकते हैं। आप पूरा दिन कैसा महसूस करते हैं? खुश रहते हैं या दुखी या सुस्त या ऐक्टिव रहते हैं, यह आप की भावनाओं पर ही निर्भर करता है। इस का असर हमारी सोच और भावनाओं के साथ मूड़ पर भी पड़ता है। हमारी भावनाएं ही हमें समान परिस्थितियों में खुश रख सकती है या दुखी। यही...

लड़कियों में एनीमिया Anemia In Girls

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लड़कियों में एनीमिया – लापरवाही का नतीजा लड़कियों में खून की कमी यानि एनीमिया के कारण कई तरह की बीमारियां बढ़ जाती हैं। अगर समय पर इन का उपचार नहीं किया जाता  है  तो यह खतरनाक साबित हो जाती हैं ।  विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार पूरी दुनिया में 20 साल तक की आयु की 49 फीसदी लड़कियां  व्रत और सही खानपान न होने के कारण ये लड़कियां एनीमिया का शिकार हो रही हैं ।  जिस का प्रभाव न केवल उन की पर्सनैलिटी  पर पड़ता है बल्कि वह बीमारियों से भी ग्रस्त होती जा रही हैं ।  वैसे तो शहर और गांव दोनों ही जगहों पर रहने वाली लड़कियां इस का शिकार हैं लेकिन गांव और गरीब परिवारों में रहने वाली लड़कियों पर इस का प्रभाव अधिक दिख रहा है । लखनऊ के चिनहट इलाके में सीजी गर्ल्स कालेज के नाम से लड़कियां का स्कूल है ।  नारी सशक्ति नाम का एनजीओ लड़कियों के स्वास्थ्य की जांच करने का काम करता है ।  नवंबर माह में नारी शक्ति एनजीओ ने अपना एक कैंप सीजी गर्ल्स कालेज में लगाया ।  कक्षा 9 से कक्षा 12 की लड़कियों का वजन और दूसरी जांचों के जरिए उन के अंदर एनीमिया का पता लगाने का ...

फेस्टिवल के दौरान ऐसे रखें सेहत का ख्याल Take care of your health during the festival

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  फेस्टिवल के दौरान ऐसे रखें सेहत का ख्याल त्यौहारों में अलग-अलग वैरायटी की मिठाइयां मार्केट में मौजूद होती हैं, लेकिन ये डिफरेंट वैरायटी कभी-कभी हमारी हेल्थ पर बुरा असर डालती है। आपने भी सुना होगा कि मीठे से कईं सारी बीमारियां होती हैं, जो हेल्थ को बहुत नुकसान पहुंचाती है। डौक्टर्स का कहना है कि अगर आप त्यौहारों में कुछ मीठा बनाना चाहते हैं तो चीनी के औप्शन की बजाय आप ब्राउन राइस सिरप, स्टीविया, शहद, गुड़, खजूर आदि को इस्तेमाल कर सकती हैं। आज हम ऐसी ही कुछ टिप्स आपको बताएंगे जो त्यौहारों में हेल्थ का ख्याल रख सकती हैं। 1. फेस्टिवल में बनाएं कुछ हेल्दी  मीठा बनाने के लिए आपके पास बहुत औप्शन हैं, पर इस बारी कुछ ऐसा पकाइए, जो न सिर्फ मीठा हो, बल्कि उसमें और भी कई पोषक तत्व मौजूद हों। इससे आपकी दिवाली में स्वाद के साथ पोषण का तड़का भी लग जाएगा। 2. खुद को रखें डीटौक्स बौडी को डीटौक्स करने के लिए तीन चीजों की जरूरत होती है, पहली पर्याप्त मात्रा में पानी मतलब हाइड्रेशन, दूसरा एंटी- औक्सीडेंट और तीसरा फाइबर। हाइड्रेशन के लिए कम से कम आठ गिलास पानी पिएं। आप तरल खुराक के तौर पर जलजीरा, न...

स्ट्रेस से बचने के लिए क्या करें What to do to avoid stress

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स्ट्रेस से बचने के लिए क्या करें, जानें डौक्टर की राय आज के लाइफस्टाइल में स्ट्रेस एक ऐसा हिस्सा बन चुका है, जिससे बचना आसान नहीं। इसकी वजह सख्त डेडलाइन, लगातार आने वाले नोटिफिकेशन, ऑफिस में लंबे समय तक काम और पर्सनल व प्रोफेशनल जिम्मेदारियों में बैलेंस बनाने का दबाव किसी भी प्रोडक्टिव इंसान को थका सकता है। हालांकि हम अक्सर अच्छे परफॉर्मेंस की उम्मीद करने से पहले स्ट्रेस वाला टाइम बीतने का इंतजार करते हैं, लेकिन सच तो ये है कि स्ट्रेस के ऐसे ही पलों के बीच इफेक्टिवली काम करना सीखना ही सबसे कीमती हुनर है। असल में तनाव के दौरान मस्तिष्क ‘सर्वाइवल मोड’ में चला जाता है। हाइपोथैलेमस और एमिग्डाला मिलकर कोर्टिसोल और एड्रेनालाईन जैसे हार्मोन छोड़ते हैं, जो दिल की धड़कन बढ़ाते हैं। इससे तात्कालिक ऊर्जा तो मिलती है, लेकिन लंबे समय तक रहने पर सोचने-समझने की क्षमता कमजोर हो सकती है। स्ट्रेस को करें मैनेज इस बारें में लाइफ कोच की एक्सपर्ट डॉ. कहती है कि इसमें अच्छी बात है कि स्ट्रेस को मैनेज करने के लिए हमेशा अपनी लाइफस्टाइल में बहुत बड़े बदलाव करने की जरूरत नहीं होती है। हमारी छोटी-छोटी और सोची सम...

स्क्रीन के अत्यधिक उपयोग से गर्दन और रीढ़ की हड्डी के स्वास्थ्य Impact of excessive screen use on neck and spinal health

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स्क्रीन के अत्यधिक उपयोग से गर्दन और रीढ़ की हड्डी के स्वास्थ्य पर चुपचाप पड़ने वाले प्रभाव कैसे पड़ते हैं आजकल कई लोगों के लिए दिन की शुरुआत और अंत स्क्रीन के साथ ही होता है। काम से जुड़ी बैठकें लैपटॉप पर होती हैं, बातचीत फोन पर चलती है, मनोरंजन स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म के जरिए मिलता है, और यहां तक ​​कि आराम करने के दौरान भी अक्सर सोशल मीडिया स्क्रॉल किया जाता है।  डिजिटल उपकरणों पर निर्भरता बढ़ने के साथ-साथ, डॉक्टर एक और प्रवृत्ति देख रहे हैं - विशेष रूप से युवा वयस्कों में, खराब शारीरिक मुद्रा से संबंधित गर्दन और रीढ़ की हड्डी की समस्याओं में तेज़ी से वृद्धि। गर्दन में जकड़न, कंधों में अकड़न, पीठ के ऊपरी हिस्से में तकलीफ और कमर दर्द की शिकायतें उन लोगों में बढ़ती जा रही हैं जो प्रतिदिन कई घंटे डिजिटल उपकरणों पर बिताते हैं।  इस समस्या को और भी चिंताजनक बनाने वाली बात यह है कि कई व्यक्तियों को इस बात का एहसास नहीं होता कि स्क्रीन का उपयोग करने की रोजमर्रा की आदतें समय के साथ रीढ़ की हड्डी के स्वास्थ्य को कितनी बुरी तरह प्रभावित कर सकती हैं।  गर्दन और रीढ़ की हड्डी पर लगातार...