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Showing posts from June, 2026

हायपरकोलेस्ट्राल: खामोश मौत का सफर Hypercholesterol: A Journey Towards a Silent Death

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विज्ञान के नित-नए अविष्कारों ने इंसान को चकाचौंध कर दिया है। चिकित्सा जगत में तो अजुबे अविष्कार् हुए हैं, अलग-अलग यंत्र, मशीनें, अनेक औषधियां और न जाने कितनी सुविधाएं पर फिर भी रोग का तांडव कम नहीं हुआ है बल्कि अनेक व्याधियों ने इंसान को अपने पंजे में जकड़ रखा है। आधुनिक जीवनशैली के कारण आज स्वास्थ्य संबंधी अनेक समस्याओं का सामना मनुष्य को करना पड़ रहहाै जैसे हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, डायबिटीज आज के संघर्षशील युग की देन है। इसके अलावा आज हमें हायपरकोलेस्ट्राल (Hypercholestrol) के भी अधिकांश रोगी मिलते हैं, इसका कारण है हमारे आहार-विहार में विषमता क्योंकि हमें ऐशो आराम की जिंदगी पसंद है। हम श्रम से कतराते हैं, ऐसी जिंदगी का ही परिणाम है - हायपरकोलेस्ट्राल कोलेस्ट्राल एक प्रकार का स्नेह (चिकनाई) पदार्थ है, जो रक्त में उपस्थित रहता है | यह पदार्थ विशिष्ट स्तर पर शरीर के लिए आवश्यक रहता है | उस स्तर से यदि अधिक बढ़ता है तो वह हायपरकोलेस्ट्राल कहलाता है, जो कि स्वास्थ्य के लिए घातक है। हृदयरोग को बढ़ानेवाला यह कोलेस्ट्राल जिसे नियंत्रण में रखना शरीर के लिए अत्यावश्यक है। इसकी अधिक मात्रा ...

ताकतवर महिला Powerful woman

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  Women Muscle Strength : छुईमुई नहीं मसल्स वाली बनो महिलाओं के लिए वेट ट्रेनिंग या स्ट्रैंथ ट्रेनिंग कोई फैशन ट्रेंड नहीं है बल्कि यह एक जरूरी हैल्थ टूल है... यह  जो हम बरसों से सुनते आए हैं कि लड़की पतली हो, नाजुक हो, सौफ्ट हो असल में यह खूबसूरती का नहीं, कमजोरी का स्टैंडर्ड है। समाज हमें बरसों से यही सिखाता आया है कि लड़की पतली, नाजुक और सौफ्ट होनी चाहिए। जितनी पतली, उतनी सुंदर यही पैरामीटर सैट कर दिया गया है। एक ऐसी लड़की जिसे आसानी से डराया, दबाया और कंट्रोल किया जा सके। जो लड़की ताकतवर दिखे, मसल्स वाली हो उसे आज भी मर्दानी या अनअट्रैक्टिव कहा जाता है, जबकि असल में वही ज्यादा सुरक्षित और आत्मनिर्भर होती है। बचपन में लड़कियों को डौल यानी गुड़िया दी जाती है जो लंबी, पतली, नाजुक होती है और लड़कों को आयरनमैन बैटमैन जैसे खिलौने जो ताकतवर हैं, लड़ सकते हैं और दुनिया बचाते हैं। यह कोई मामूली बात नहीं है बल्कि समाज की एक ट्रेनिंग है। लड़कियों को सिखाया जाता है कि उन्हें सुंदर दिखना है और लड़कों को सिखाया जाता है कि उन्हें मजबूत बनना है और यह केवल पतली लड़कियों को ही नहीं बल्क...

बचपन की एक गलत सीख A wrong lesson learned in childhood

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  बचपन की एक गलत सीख भी बन सकती है जानलेवा दिल्ली के 24 साल के एक युवक की कहानी रूह कंपा देने वाली है। बचपन में उसने कहीं सुन लिया- ‘‘बालों में प्रौटीन होता है।’’ भोलेपन में उस ने बाल खाने शुरू कर दिए। Childhood Trauma: ‘‘जो बचपन में सीखा वही जीवन भर साथ निभाता है’’ – यह कहावत हमने कई बार सुनी है। पर कभी सोचा है अगर बचपन में सीख ही गलत हो तो क्या होगा? दिल्ली के 24 साल के एक युवक की कहानी रूह कंपा देने वाली है। बचपन में उसने कहीं सुन लिया- ‘‘बालों में प्रौटीन होता है।’’ भोलेपन में उस ने बाल खाने शुरू कर दिए। घरवालों को लगा ये तो छोटी आदत है अपने आप छूट जाएगी। पर सालों बाद यही आदत उसके पेट में 9 सेंटीमीटर लंबा, सख्त बालों का गुच्छा बन गई। नतीजा असहनीय पेट दर्द, उल्टी, खाना न पचना और आखिर में ऑपरेशन टेबल। डाक्टर इसे मेडिकल भाषा में ‘‘ट्राइकोबेजोआर’’ कहते हैं। जब कोई व्यक्ति बार-बार बाल निगलता है तो शरीर न तो उन्हें पचा पाता है, न ही बाहर निकाल पाता है। बाल पेट में जमा होकर धीरे-धीरे एक ठोस, उलझी हुई गांठ बना लेते हैं। ये गांठ आंतों को ब्लाक कर देती है। लक्षण शुरू में हल्के लगते हैं –...

बच्चों पर चिल्लाना पड़ सकता है भारी Yelling at children could prove costly

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  बच्चों पर चिल्लाना पड़ सकता है भारी, साइकोलॉजी पर डालता है असर बच्चे जब ज्यादा छोटे होते हैं, तब उनकी शरारत अच्छी लगती है। लेकिन वही बच्चे जब थोड़ा बड़े हो जाएं, तो उनकी शरारतों और हरकतों पर कई बार मां-बाप को तेज गुस्सा आता है... बच्चे जब ज्यादा छोटे होते हैं, तब उनकी शरारत अच्छी लगती है। लेकिन वही बच्चे जब थोड़ा बड़े हो जाएं, तो उनकी शरारतों और हरकतों पर कई बार मां-बाप को तेज गुस्सा आता है। इस गुस्से में कई बार मां-बाप अपने बच्चे पर चिल्लाने लगते हैं, गुस्सा करने लगते हैं। माता-पिता के गुस्से को देखकर बच्चा शांत जरूर हो जाता है, लेकिन उसके बाल मन पर इस तरह चिल्लाने और गुस्सा करने का बुरा असर पड़ता है। मां-बाप के द्वारा बच्चे से चिल्लाकर बात करने की आदत का उनकी साइकोलॉजी (मनोविज्ञान) पर बुरा असर पड़ता है। आइए आपको बताते हैं क्या हैं वो दुष्प्रभाव और क्यों नहीं करना चाहिए बच्चों से चिल्लाकर बात। मानसिक विकास पर पड़ता है असर अगर आप अपने बच्चे पर बहुत अधिक गुस्सा करते हैं, उसे हर समय डराकर रखते हैं और उसे हर बात पर टोकते और नजर रखते हैं, तो इससे बच्चे के मानसिक विकास पर असर पड़त...

गाउट की समस्या The problem of gout

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  जानें गाउट की समस्या का क्या है कारण गाउट का दर्द शरीर में यूरिक एसिड के बढ़ने से होता है। इस से जोड़ों, तरल पदार्थो व उत्तकों में क्रिस्टल एकत्रित हो जाते हैं। कई बार ऐसा हुआ कि सुरेश रात को सोते-सोते नींद से जाग जाते और अचानक से अंगूठे में असहनीय दर्द की तकलीफ के बारे में बोलने लगते। शुरुआत में तो जब दर्द होता तो आराम के लिए पेन किलर खा लेते थे लेकिन धीरे-धीरे यह जब रोज-रोज का दर्द होने लगा तब उन्होंने डाक्टर को दिखाया। पता चला की यह मामूली नहीं बल्कि गाउट का दर्द है। क्या होता है गाउट गाउट का दर्द शरीर में यूरिक एसिड के बढ़ने से होता है। इस से जोड़ों, तरल पदार्थो व उत्तकों में क्रिस्टल एकत्रित हो जाते हैं। यह दर्द शरीर के एक हिस्से से शुरू होता है। दर्द अधिकतर रात को सोते समय ही होता है। ऐसा इसलिए कि सोते समय शरीर का तापमान कम हो जाता है, शरीर में पानी की कमी व सांसों की गति में गिरावट आने के कारण फेफड़े पर्याप्त मात्रा में कार्बन डाइऔक्साइड बाहर नहीं निकाल पाते, जिस कारण जोड़ों में यूरिक एसिड के क्रिस्टल जमा हो जाते हैं। यही दर्द गाउट का दर्द कहलाता है। लक्षण जानें यह आमतौर पर अंगू...

टिनिटस होने के क्या हैं कारण? What are the causes of tinnitus?

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  टिनिटस होने के क्या हैं कारण, जानें बचाव के तरीके टिनिटस किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ इस की संभावना अधिक बढ़ जाती है क्योंकि सुनने की क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है। 30 साल के संदीप को हमेशा कान में कुछ सुनाई पड़ता है, बाहर कुछ साउंड न होने पर भी उसे लगता है कि कुछ आवाज उस के कानों तक आ रही है। परेशान हो कर उस ने डाक्टर की सलाह ली, जिस में पता चला कि वह हमेशा कान में हैडफोन लगा कर तेज आवाज में गाना सुनना पसंद करता है, जिस से उसे यह समस्या हुई है क्योंकि गाने को बंद करने के बाद भी उसे सीटी जैसी आवाज कानों में आती रहती है । कई बार उस ने अपनी गर्लफ्रैंड से भी पूछा कि क्या कोई आवाज उसे सुनाई दे रही है? उस के मना करने पर पहले तो वह इसे अपना भ्रम समझा, लेकिन बाद में उसे असहजता महसूस होने लगी । इलाज के बाद और कई दिनों तक हैडफोन न लगाने के बाद उसे इस साउंड से निजात मिली । असल में टिनिटस (Tinnitus) कान से जुड़ी एक ऐसी स्थिति है, जिस में व्यक्ति को ऐसी आवाज सुनाई देती है, जिसे आसपास मौजूद अन्य लोग नहीं सुन पाते । आमतौर पर यह आवाज घंटी बजने, भिनभिनाहट, सीटी जैसी आवा...

फिटनेस फ्रिक लोगों को क्यों आता है हार्ट अटैक? Why do fitness freaks suffer heart attacks?

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  फिटनेस फ्रिक लोगों को क्यों आता है हार्ट अटैक, Akshay Kumar ने बताई इसकी वजह और बचने के टिप्स अक्षय कुमार के अनुसार आज के युवा वर्ग में एक ऐसी प्रवृत्ति पाई जा रही है जिसमे वह कम समय में ज्यादा से ज्यादा पाने की कोशिश में लगे रहते हैं। अक्षय कुमार उन एक्टरों में से एक है जो सिक्स पैक मसल्स वाली बौडी बनाने के बजाय फिटनेस, अच्छी सेहत, एनर्जी से भरपूर स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हैं ।  जिसके चलते अक्षय कुमार वेटलिफ्टिंग, स्टेराइड्स, सप्लीमेंट लेने के बजाय सीढ़ी चढ़ना, दौड़ना, और घर का बना खाना खाकर अच्छी सेहत बनाने पर ज्यादा विश्वास रखते हैं ।  हाल ही में हुई बातचीत के दौरान अक्षय कुमार ने युवाओं में बढ़ती अति व्यस्तता के चलते टेंशन, डिप्रेशन, हाइपर टेंशन और जल्दी से जल्दी हीरो और हीरोइन की तरह बौडी बनाने के चक्कर में सप्लीमेंट स्टेराइड लेकर अपने आप को मानसिक और शारीरिक तौर पर गंभीर बीमारी की तरफ़ ढकेलते हुए कम उम्र में दिल की बीमारी से ग्रस्त होने वाले युवाओं के प्रति चिंता जाहिर की….. अक्षय कुमार ने बताया की उन्होंने पिछले कुछ दिनों पहले एक अस्पताल में विजिट किया था । ...

Pregnancy में प्रोटीन की कमी Protein Deficiency During Pregnancy

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  Pregnancy में प्रोटीन की कमी हो सकती है खतरनाक, डाइट में खाएं ये फूड्स गर्भावस्‍था में प्रेगनेंट महिला और गर्भस्‍थ शिशु के विकास और स्‍वास्‍थ्‍य के लिए प्रोटीन का सेवन बहुत जरूरी है। शरीर में प्रोटीन की कमी होने पर मां और बच्‍चे को कई तरह की दिक्‍कतों का सामना करना पड़ सकता है। प्रेगनेंट महिलाओं (Pregnancy) को अधिक पोषण की जरूरत होती है और इस दौरान उन्‍हें प्रोटीन समेत कई पोषक तत्‍व लेने बहुत जरूरी होते हैं ताकि शिशु का सही विकास हो सके। गर्भावस्‍था के नौ महीनों के दौरान भ्रूण के विकास के लिए रोजाना 75 ग्राम से 100 ग्राम तक प्रोटीन लेना होता है। प्रेग्‍नेंसी में गर्भाशय के ऊतकों के विकास के लिए प्रोटीन बहुत जरूरी होता है। इस के अलावा भी गर्भावस्‍था में प्रोटीन युक्‍त आहार लेने से कई फायदे होते हैं। प्रोटीन युक्‍त आहार आप दूध से बने उत्‍पादों से प्रोटीन ले सकती हैं। दही, अंडा, दूध, चीज और पनीर को अपने भोजन में शामिल करें। इस के अलावा सूखे मेवों और बीजों में भी प्रचुर मात्रा में प्रोटीन होता है। पिस्‍ता, नारियल और बादाम का नियमित इस्तेमाल करें, सूरजमुखी के बीजों,...

Chronic Kidney Disease: साइलैंट किलर है किडनी रोग

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  Chronic Kidney Disease: साइलैंट किलर है किडनी रोग भारत में किडनी की बीमारी बहुत तेजी से एक महामारी का रूप लेती जा रही है। हर 10 में से 1 व्यक्ति किसी न किसी स्तर की किडनी की समस्या से जूझ रहा है। जानें अगर किडनी फेल हो जाए तो इस का क्या इलाज है। रवि नागर के बड़े भाई नीरज नागर, जिन की आयु अभी 55 वर्ष थी, की कलाइयों के ऊपरी हिस्से में कुछ दिनों से सूजन और दर्द था। उन्होंने नौकर से चार-पांच दिन तेल-मालिश करवाई। उन को लगा कि ठंड की वजह से सूजन आ गई है। मगर मालिश से कोई खास फर्क नहीं पड़ा। इधर कुछ दिनों से यूरिन करने में भी कुछ परेशानी हो रही थी। यूरिन महसूस तो होता था मगर खुल कर होता नहीं था। दिसंबर का महीना था। ठंड अधिक थी। लिहाजा, उन्होंने इन लक्षणों को ठंड के कारण उत्पन्न लक्षण समझा और डाक्टर के पास नहीं गए। एक दिन जब अचानक चक्कर आया तो उन की पत्नी ने उन्हें डाक्टर के पास जाने की सलाह दी। शाम को पति-पत्नी अपने फैमिली डाक्टर के पास गए। डाक्टर ने थोड़ी देर एग्जामिन किया और कुछ टैस्ट लिखे। दूसरे दिन जब टैस्ट रिपोर्ट आईं तो डाक्टर ने तुरंत हौस्पिटल में एडमिट होने के लिए कहा। नीरज नागर के...