ताकतवर महिला Powerful woman

 

Women Muscle Strength : छुईमुई नहीं मसल्स वाली बनो

महिलाओं के लिए वेट ट्रेनिंग या स्ट्रैंथ ट्रेनिंग कोई फैशन ट्रेंड नहीं है बल्कि यह एक जरूरी हैल्थ टूल है...

यह  जो हम बरसों से सुनते आए हैं कि लड़की पतली हो, नाजुक हो, सौफ्ट हो असल में यह खूबसूरती का नहीं, कमजोरी का स्टैंडर्ड है।

समाज हमें बरसों से यही सिखाता आया है कि लड़की पतली, नाजुक और सौफ्ट होनी चाहिए। जितनी पतली, उतनी सुंदर यही पैरामीटर सैट कर दिया गया है। एक ऐसी लड़की जिसे आसानी से डराया, दबाया और कंट्रोल किया जा सके। जो लड़की ताकतवर दिखे, मसल्स वाली हो उसे आज भी मर्दानी या अनअट्रैक्टिव कहा जाता है, जबकि असल में वही ज्यादा सुरक्षित और आत्मनिर्भर होती है।

बचपन में लड़कियों को डौल यानी गुड़िया दी जाती है जो लंबी, पतली, नाजुक होती है और लड़कों को आयरनमैन बैटमैन जैसे खिलौने जो ताकतवर हैं, लड़ सकते हैं और दुनिया बचाते हैं। यह कोई मामूली बात नहीं है बल्कि समाज की एक ट्रेनिंग है। लड़कियों को सिखाया जाता है कि उन्हें सुंदर दिखना है और लड़कों को सिखाया जाता है कि उन्हें मजबूत बनना है और यह केवल पतली लड़कियों को ही नहीं बल्कि लड़कियों के लिए भी उतना ही लागू होता है क्योंकि चरबी होने का यह मतलब नहीं कि आप ताकतवर भी हैं।

जरूरी हैल्थ टूल्स

आज भी अगर कोई लड़की जिम जा कर वेट उठाए या बौडी बनाए तो लोग उसे अजीब नजरों से देखते हैं। कई बार अगर लड़के भी उसी जिम में मौजूद हों तो तरह-तरह के कमैंट भी मिलते हैं जैसे ‘लड़की हो लड़की की तरह रहो,’ ‘कितनी भी कोशिश कर लो मर्दों की बराबरी नहीं कर सकती तुम’ आदि-आदि। ये सब कमैंट्स इसलिए किए जाते हैं क्योंकि लड़कियों की मसल्स मेल ईगो को हर्ट करती हैं। वे नहीं चाहते कि वे लड़कियों से पिछड़े हुए दिखें और वह भी बौडी के मामले में। आखिर लड़कियों को जानबूझ कर इतना कमजोर क्यों बनाया जा रहा है?

यह उन समस्याओं को रोकने में मदद करता है जो धीरे-धीरे जिंदगी की क्वालिटी खराब करती हैं जैसे हड्डियों का कमजोर होना, मांसपेशियों का कम होना, मेटाबोलिज्म का स्लो होना आदि।

आज तो दुनिया की बड़ी हैल्थ संस्थाएं भी स्ट्रैंथ ट्रेनिंग को जरूरी मानती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की 2020 की गाइडलाइन कहती है कि हर वयस्क महिला को हफ्ते में कम से कम 2 दिन पूरे शरीर की मांसपेशियों की ट्रेनिंग करनी चाहिए। इस के अलावा मांसपेशियां सिर्फ शरीर का शेप नहीं बनातीं बल्कि बढ़ती उम्र में बीमारियां होने से भी बचाती हैं।

जब हम रेप और हिंसा की बात करते हैं तो लड़कियों को सिर्फ सावधान रहने की सलाह दी जाती है। अकेले मत जाओ, रात में बाहर मत निकलो, कपड़े ऐसे मत पहनो। मगर उन्हें यह नहीं सिखाया जाता कि अगर कोई हमला करे तो शरीर से कैसे बचाव करें। लेकिन इसी जगह एक स्ट्रौंग लड़की होगी जो दौड़ सकती है, धक्का दे सकती है, पकड़ से निकल सकती है, उस के पास सिर्फ डर नहीं बल्कि लड़ने और बचने का मौका होता है। कमजोर शरीर वाली लड़की के पास सिर्फ सहने का विकल्प रह जाता है और यह सचाई बहुत कड़वी है।

औप्शन नहीं जरूरत

समाज ने औरत के शरीर को सिर्फ उभरी हुई ब्रैस्ट और हिप्स तक सीमित कर दिया है ताकि बौडी सिर्फ अट्रैक्टिव दिखे। लेकिन ये किसी को न बचा सकते हैं, न किसी मुश्किल काम में मदद करते हैं। मसल्स मदद करती हैं, ताकत मदद करती है, फुरती मदद करती है। इसी वजह से ताकतवर औरतें हमेशा असुविधाजनक मानी गईं क्योंकि उन्हें कंट्रोल करना आसान नहीं होता। इसलिए लड़कियों के लिए स्ट्रैंथ कोई फैशन या औप्शन नहीं बल्कि जरूरत है।

मजबूत शरीर का मतलब है ज्यादा आजादी, सुरक्षा और आत्मसम्मान। ऐसी लड़की अकेले ट्रैवल कर सकती है, खुल कर न कह सकती है और जरूरत पड़ने पर खुद की रक्षा कर सकती है। मस्कुलर होना बदसूरत होना नहीं है बल्कि कौन्फिडैंट और सुरक्षित रहने की ताकत है।

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