इमोशंस आप पर हावी या आप इमोशंस पर? Emotions overpower you, or you on your emotions?

इमोशंस आप पर हावी या आप इमोशंस पर – बेहतर मानसिक स्वास्थ्य के लिए कैसे करें कंट्रोल

 किसी बात पर भड़कना, ग़ुस्सा करना, निराश होना, चिंता होना आदि भावनाएं या इमोशंस जीवन का हिस्सा हैं। अगर इन भावनाओं को काबू में रखा जाए तो तनाव से दूर व खुश रहा जा सकता है और हर काम को सफलतापूर्वक पूरा किया जा सकता है।

बेहतर मानसिक स्वास्थ्य के लिए इमोशंस पर कंट्रोल होना आवश्यक है। कई बार इमोशंस हमारे ऊपर इस कदर हावी हो जाते हैं कि हम न तो सही निर्णय ले पाते हैं, न ही कुछ ठीक से सोच-समझ पाते हैं। जल्दबाजी में हम कुछ गलत कर बैठते है और बाद में फिर मानसिक तनाव से गुज़रते है। यह तनाव हमें शारीरिक व मानसिक रूप से बीमार बना सकता है। इस से बचने के लिए यदि हम इमोशंस पर कंट्रोल रख पाए तो इस दौड़भाग वाली लाइफस्टाइल में एक बेहतर मानसिक स्वास्थ्य पा सकते हैं।

आप पूरा दिन कैसा महसूस करते हैं? खुश रहते हैं या दुखी या सुस्त या ऐक्टिव रहते हैं, यह आप की भावनाओं पर ही निर्भर करता है। इस का असर हमारी सोच और भावनाओं के साथ मूड़ पर भी पड़ता है। हमारी भावनाएं ही हमें समान परिस्थितियों में खुश रख सकती है या दुखी। यही किसी काम को बना सकती हैं और बिगाड़ भी।

आजकल की दौड़भाग और तनावभरी लाइफस्टाइल के बीच डिप्रैशन, भय, गुस्सा, एंग्जायटी, टैंशन, बेचैनी समय-समय पर सभी लोगों को परेशान करती हैं। हमारी कई सारी परेशानियां इमोशंस के कारण शरीर में सामंजस्य की कमी, असंतुलन और अनसुलझे मुद्दों के कारण होती हैं, चाहे वे आप के वर्तमान के हों या अतीत के।

लाइफ में इमोशन यानी भावना का बड़ा रोल या महत्व है क्योंकि यह हमारी रोजमर्रा की लाइफ के साथ-साथ हमारे शरीर के ऊपर भी प्रभाव डालती है। यदि हम इस पर कंट्रोल कर लेते हैं तो कई प्रौब्लम्स खुदबखुद हल हो जाती हैं। यदि इमोशंस पर आप का कंट्रोल नहीं है तो आप मानसिक रूप से बीमार हो सकते हैं। इस के चलते कई चीजें आप को काफी परेशान भी कर सकती हैं। ऐसे में कुछ आसान टिप्स से आप अपने इमोशन को काबू में रख सकते हैं और अपने तनाव, एंग्जायटी या चिंता को काफी हद तक कम कर सकते हैं।

अकसर ऐसा होता है जब हम कोई बहुत जरूरी काम करने जाते हैं, जैसे एग्जाम या इंटरव्यू देने, किसी डाक्टर आदि के यहां जाते हैं तब हमारे ऊपर एक अजीब सा डर हावी हो जाता है कि पता नहीं पेपर या इंटरव्यू कैसा होगा, कुछ आएगा कि नहीं, पता नहीं डाक्टर क्या कहेगा, वह कौन सी बीमारी बता दे। इन जैसे सवालों के साथ हमारे ऊपर एंग्जायटी हावी हो जाती है जिस के कारण तनाव हो जाता है। यदि हम ने इस एंग्जायटी इमोशन पर काबू नहीं पाया तो हो सकता है पेपर बिगड़ जाए, सबकुछ आते हुए भी कुछ न कर पाएं या गलत हो जाए, इंटरव्यू में बोल न पाएं, डाक्टर के यहां पहुंचने पर ब्लडप्रैशर बढ़ जाए।

 एंग्जायटी को इस तरह करें काबू

  • अपनी परेशानी या उलझन किसी के साथ शेयर कर लें।
  • योग और मैडिटेशन का सहारा लें, यह आप के दिमाग को शांत कर आप की एंग्जायटी को कम करने में काफी हद तक मदद करेगा।
  • आत्मविश्वास से भरे रहें, अच्छा सोचें, सोच को सकारात्मक रखें।
  • दिमाग का फोकस या ध्यान कहीं और ले जाएं।
  • ऐसे में जो कुछ भी आप महसूस कर रहे हैं, उसे शब्दों, ड्राइंग या पेंटिंग में प्रकट होने दें या करें, फिर उन में कलर भरें, पज़ल्स सौल्व करें। अपनी भावनाओं और ट्रिगर की गई प्रतिक्रियाओं को लिखना शुरू करें। यह आप को मुश्किल हालात से बाहर निकालने में मदद कर सकता है।

ग़ुस्से को ऐसे करें काबू

कई बार ऐसा होता है कि किसी बात पर हमें बहुत तेज ग़ुस्सा आता है। तब हमें इमोशंस पर कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है। सो, हम कुछ गलत कर बैठते हैं, किसी बात पर लिया फैसला गलत हो जाता है। बाद में हम पछताते हैं।

जब आप को ग़ुस्सा आए तब अपने मन में आनेजाने वाले विचारों के प्रति सचेत रहें और यह जानें कि कौन से विचार आप के लिए नुकसानदायक या उपयोगी नहीं हैं। ऐसी स्थिति में अपने शरीर पर आने वाले बदलावों पर विशेष ध्यान दें। यह परखें कि शरीर आप के विचारों पर कैसी प्रतिक्रिया करता है, जैसे हार्ट रेट बढ़ना, पसीना आना, तेज़ सांस लेना, दांत किटकिटाना, जबड़ा कसना, तनाव महसूस होना, चेहरे का लाल होना आदि।

सभी लोग अपने गुस्से पर अलग-अलग तरह से प्रतिक्रिया करते हैं। इन में गुस्से को अंदर ही अंदर दबाना या दबा कर रखना, अपनी भावनाओं को व्यक्त करना, किसी गलत काम में बदलना, चीजों पर हमला करना और उन्हें मारना शामिल हैं। ये व्यवहार विनाशकारी और परेशान करने वाले होते हैं।

यदि हमारे ग़ुस्से का हम पर या हमारे आसपास के लोगों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है, तो ग़ुस्से को नियंत्रित करने के लिए हमें उसे शांत करने की आवश्यकता होती है, जो कि बहुत ही चुनौतीपूर्ण होता है।

ऐसे में ग़ुस्से के इमोशंस को कंट्रोल करने के लिए गहरी सांस लें, थोड़ा सोचें, खुद को थोड़ा समय दें। ऐसा करने से तनाव कम होगा, इमोशंस कंट्रोल होंगे, मन को शांत करने में मदद मिलेगी और सही फैसला ले सकेंगे।

एक्सपर्ट्स के अनुसार, लंबे समय तक गुस्से की भावना रखने के कारण हाई ब्लडप्रैशर, हाई हार्ट रेट, मसल्स पेन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। यह मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकता है, जिस के कारण चिड़चिड़ापन, डिप्रैशन, चिंता रहने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। यदि ऐसा लगे कि इमोशनल स्ट्रैस काफी बढ़ गया है और आप खुद उन्हें रिलीज करने में सक्षम नहीं हैं, तो किसी प्रोफैशनल या डाक्टर की मदद लें।

सैडनैस का इमोशन

सैडनेस या उदासी इमोशन की ऐसी स्थिति है जिस में हमें निराशा की भावना आती है। हम खुश नहीं रह पाते। कभी-कभी यह भावना बहुत तीव्र महसूस हो सकती हैं, जबकि कुछ मामलों में  काफी हलकी भी हो सकती है। यह थोड़े समय के बाद कम हो जाती है। लेकिन जब यह सैडनैस लंबे समय तक रहती है तब यह उदासी का इमोशन अवसाद में बदल सकता है और एक बीमारी का रूप ले सकता है। ऐसे में समय रहते इस पर काबू पाना जरूरी हो जाता है। इस के लिए जब भी आप को ऐसा लगे कि आप के ऊपर सैडनैस हावी हो रही है तो उसे इस तरह काबू करें-

  • अपनी पसंद का कोई काम कर लें।
  • सकारात्मक या पौजिटिव चीजों पर फोकस करें।
  • बाहर घूमने चले जाएं।
  • अपनी पसंद का खाना खा लें।
  • संगीत सुन लें।
  • अपने किसी दोस्त या परिवारजनों से बात कर लें।
  • उदासी का कारण जानने की कोशिश करें ताकि उसे दूर किया जा सके।

आप के इमोशंस कोई भी हों, इन पर नियंत्रण पाने के लिए यह ध्यान देना जरूरी है कि आप के इमोशंस कब आउट औफ कंट्रोल हो रहे हैं। इन की पहचान करना इमोशंस पर काबू पाने का पहला स्टैप होता है। आप के इमोशंस जब बाहर आएं तब उन्हें समझने के लिए माइंडफुलनैस और तर्कसंगत विचारों की जरूरत होती है।

खुद के साथ कौन्फिडैंट और दृढ़ता के साथ कम्युनिकेट करना : आप कोई एग्जाम देने या कोई मैच खेलने या इंटरव्यू देने जाएं तब हो सकता है आप के ऊपर निराशा हावी हो जाए। तब आप आत्मविश्वास से भरपूर रहें और खुद से कनैक्ट हो कर कहें, ‘मुझे सबकुछ आता है, एग्जाम या इंटरव्यू अच्छा ही होगा। हम मैच जीतेंगे, हम ने बहुत प्रैक्टिस की है’ आदि।

अपने इमोशंस के ऊपर हैल्दी/पौजिटिव तरीके से रिऐक्ट करना : यदि आप के ऊपर ग़ुस्से का इमोशन हावी हो रहा है तो उसे शांत करें। अपना ध्यान कहीं और ले जाएं। थोड़ा टहल लें। अपनी पसंद का कोई काम कर लें या म्यूजिक सुन लें। जैसे, परिवार या पति-पत्नी के लड़ाई-झगड़े के बीच ग़ुस्सा आना नैचुरल है। इस इमोशन के कारण हम कुछ गलत कदम उठा लेते हैं। कुछ भी गलत कर बैठते हैं, फिर पछताते हैं। लेकिन यदि यहां हम ने अपने इमोशन को काबू में नहीं रखा तो संबंध हमेशा के लिए बिगड़ या ख़त्म हो सकते हैं। ऐसे में ग़ुस्से के इमोशन को हैल्दी/ पौजिटिव तरीके से काबू में रखने के लिए शांत रहें। बहस से बचें और थोड़ा सकारात्मक सोचें।

मैडिटेशन करें : खुद को कंट्रोल करने का सब से कारगर और बेहतर तरीका मैडिटेशन करना है। इस से आप मानसिक तौर पर काफी मजबूत बनेंगे और आप का खुद पर कंट्रोल भी जबरदस्त होगा। इस के लिए रोज नियमित रूप से मैडिटेशन को अपनी आदत का हिस्सा बनाएं।

इमोशंस हमारे जीवन का हिस्सा हैं। लेकिन इमोशंस को अपने ऊपर हावी कर लेना मैंटल हैल्थ के लिए ठीक नहीं। कई बार इस से चीजें बिगड़ती हैं और तनाव भी बढ़ता है। ऐसे में कोशिश करें कि इमोशंस आप पर हावी न हों। अपनी भावनाओं को बदलने के लिए हमें अपने विचारों, अपने शब्दों और अपने कार्यों को बदलना जरूरी हो जाता है क्योंकि कहीं न कहीं हमारे विचार, शब्द और कार्य हमारी भावनाओं (इमोशंस) को प्रभावित करते हैं।

Comments

Popular posts from this blog

About Us

आनुवंशिक मांसपेशी विकार Genetic Muscle Disorder

Psychological Trap : फोफो