हीट स्ट्रोक से खुद को बचाएं Protect yourself from heatstroke
हीट स्ट्रोक से खुद को बचाएं कुछ इस तरह
हीट स्ट्रोक एक गंभीर समस्या है। यह तब होता है, जब हमारा शरीर बहुत ज्यादा गरम हो जाता है और खुद को ठंडा नहीं रख पाता।
हर साल बढ़ती ग्लोबल वार्मिंग की वजह से हीट स्ट्रोक यानि लू के मामले तेजी से बढ़े हैं, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है। ग्लोबल वार्मिंग का मुख्य कारण मानवीय गतिविधियों से वातावरण में ग्रीनहाउस गैसों जैसे सीओ2, मीथेन आदि की बढ़ती वजह है, जो सूर्य की गरमी को रोक कर पृथ्वी के तापमान में वृद्धि कर रही है। इस में प्रमुख योगदान कोयला, तेल और गैस जैसे जीवाश्म ईंधनों का जलना, वनों की कटाई और औद्योगिकरण है, जिसे रोकना संभव नहीं है।
ऐसे में इस से बचने के लिए पर्याप्त पानी पीना, धूप में निकलने से बचना, ढीले और हलके रंग के कपड़े पहनने की सलाह ऐक्सपर्ट लगातार देते हैं। खासकर बाहर जाने वालों को इस तेज गरमी से बचने के लिए कुछ सावधानियां रखने की आवश्यकता है।
जीरकपुर की स्वास्तिक क्लिनिक के इंटर्नल मैडिसिन के कंसल्टेंट डाक्टर के पी कौशिक कहती हैं कि काम के सिलसिले में गरमियों में रोज बाहर आने-जाने वाले सभी को अपनी सेहत का खास खयाल रखना चाहिए, ताकि वे हीट स्ट्रोक की चपेट में न आएं। इस में सब से जरूरी है कि आप दिनभर खूब पानी पीएं, लंबे सफर या बाहर रहने के दौरान अपने साथ पानी की बोतल या इलैक्ट्रोलाइट जरूर रखें। हमेशा हलके रंग के और ढीले-ढाले कपड़े पहनें ताकि शरीर ठंडा रहे।
डाक्टर बताते हैं कि कोशिश करें कि सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे की तेज धूप में सीधे न निकलें। संभव हो तो बीच-बीच में किसी छायादार या ठंडी जगह पर आराम करें, इस से शरीर का तापमान सही रहता है। इस के अलावा तेज धूप से बचने के लिए सनस्क्रीन, सनग्लासेस और टोपी का इस्तेमाल करना बहुत फायदेमंद होता है।
डाक्टर कहते है कि जीरकपुर पंचकूला चंडीगढ़ और मोहाली जैसे शहरों में हीट स्ट्रोक के मरीज ज्यादा नहीं दिखते थे मगर तेज होते शहरीकरण के कारण पिछले कुछ सालों में गरमी की वजह से शरीर में पानी की कमी यानि डिहाइड्रेशन के मामले बढ़े हैं। आंकड़ों के अनुसार, ऐसे मरीजों की संख्या में लगभग 10% की बढ़ोत्तरी देखी गई है।
हीट स्ट्रोक के लक्षण
हीट स्ट्रोक एक गंभीर समस्या है। यह तब होता है, जब हमारा शरीर बहुत ज्यादा गरम हो जाता है और खुद को ठंडा नहीं रख पाता। इस के आम लक्षणों में तेज बुखार, सिरदर्द, चक्कर आना, जी मिचलाना, जिस में उलटी, तेज धड़कन, मांसपेशियों में ऐंठन और बहुत ज्यादा थकान महसूस होना आदि शामिल हैं।
गंभीर मामलों में व्यक्ति को धुंधलापन या उलझन महसूस हो सकती है, वह बेहोश हो सकता है या उस की सांसें तेज और हलकी हो सकती हैं। इस दौरान त्वचा बहुत गरम और सूखी महसूस हो सकती है या पसीना आ सकता है। हालांकि इस के लक्षण बहुत जल्दी खतरनाक हो सकते हैं, इसलिए इसे तुरंत पहचानना और शरीर को ठंडक पहुंचाना बहुत जरूरी है।
कब जाएं डाक्टर के पास जाएं
थकान, बहुत ज्यादा पसीना आना या हलका चक्कर आने जैसे मामूली लक्षणों को घर पर ही ठीक किया जा सकता है, ऐसे में व्यक्ति को किसी ठंडी जगह पर ले जाएं, उन्हें आराम करने दें और खूब पानी या ओआरएस (ORS) पिलाएं, शरीर को ठंडक पहुंचाने के लिए पंखे का इस्तेमाल करें या ठंडे पानी में कपड़ा भिगो कर शरीर को पोंछें या माथे पर गीली पट्टियां रखें, लेकिन अगर हालत ज्यादा खराब होने लगे, तो बिना देरी किए डाक्टर के पास जाना चाहिए। तेज बुखार, उलझन महसूस होना, बेहोशी, बार-बार उलटी आना, सांस लेने में तकलीफ या दिल की धड़कन का बहुत तेज होना आदि सब खतरे के संकेत हैं। गंभीर स्थिति में इलाज में देरी करना जानलेवा हो सकता है।
बाहर जा कर जौब करने वालों के लिए खास टिप्स :
-फील्ड या मार्केटिंग का काम करने वाले लोग लंबे समय तक धूप में रहते हैं, इसलिए उन्हें लू लगने का खतरा ज्यादा होता है। उन्हें दिनभर खूब पानी पीना और दोपहर की तेज धूप में ज्यादा मेहनत वाले काम से बचना चाहिए।
-अपने साथ हमेशा ओआरएस के पैकेट रखना या आजकल एनर्जी ड्रिंक टेबलेट भी आती हैं और थोड़ी-थोड़ी देर में पानी या जूस पीते रहना, ताकि शरीर में पानी की कमी न हो।
-हवादार और सूती कपड़े पहनना और बीच-बीच में किसी छाया वाली या ठंडी जगह पर आराम करने की कोशिश करना इस से शरीर जरूरत से ज्यादा गरम नहीं होगा।
-जहां तक हो सके, बाहर के काम या सफर की प्लानिंग सुबह या शाम के ठंडे समय में ही करें।
शरीर पर एअर कंडीशनर का असर
बार-बार एअर कंडीशनर से तेज धूप में निकलने और फिर वापस एसी में आने से शरीर पर असर पड़ता है। तापमान में अचानक होने वाले इस बदलाव की वजह से शरीर जल्दी तालमेल नहीं बैठा पाता, जिस से सिरदर्द, थकान, शरीर में पानी की कमी और बेचैनी हो सकती है। एसी में रहने से शरीर को पसीना कम आता है, लेकिन बाहर की गरमी में शरीर का पानी तेजी से खत्म होने लगता है, जिस से डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है। इस के असर को कम करने के लिए दिनभर खूब पानी पीते रहें और एसी का तापमान ज्यादा ठंडा न रखें। बाहर निकलने से पहले शरीर को धीरे-धीरे तापमान के हिसाब से ढलने का समय दें। आरामदायक कपड़े पहनें और ठंडी जगह से निकलते ही अचानक बहुत देर तक तेज धूप में न खड़े हों। इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रख कर आप सुरक्षित रह सकते हैं। ये सब मेरे साथ भी हुआ एयर कंडीशनर से निकल कर दो तीन बार धूप में जाना पड़ा वापिस एयर कंडीशनर में आना फिर जाना इस कारण शाम तक बुखार आना शुरू हो गया मगर सिर्फ ओआरएस के चार टेट्रा पैक इकठ्ठे पीने से ठीक हो गया।
इस प्रकार तपती गरमी में हीट स्ट्रोक से बचना आसान होता है, लेकिन इस के लिए पूरी प्लानिंग के साथ बाहर निकल कर काम करने की जरूरत होती है, ताकि आप पूरे दिन हाइड्रेट रहें और अपना काम बिना किसी समस्या के करते रहें।

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