समाज पर AI का प्रभाव AI Impact On Society

 

AI Impact On Society: तेरेमेरे बीच में कैसा है ये एआई अनजाना

अब सवाल पूछने के लिए दोस्त की जरूरत नहीं पड़ती। मोबाइल उठाया, कुछ शब्द टाइप किए और जवाब मिल जाता है। इस से हमारी लाइफ में तेजी जरूर आई है, लेकिन इसी तेजी में रिश्तों की रफ्तार धीमी पड़ने लगी।

आज हम अपने टॉपिक को थोड़ा चेंज करेंगे। स्वास्थय की दुनिया से निकल कर बदलते रिश्तों की बात करेंगे। एक प्रसिद्ध हिंदी फिल्म बदलते रिश्ते का गाना भी यही कहता है। ना जाने कैसे पल में बदल जाते हैं, ये दुनिया के बदलते रिश्ते। आजकल की दुनिया में तकनीक ने हमारी जिंदगी को बहुत आसान बना दिया है। पहले जहां छोटी-छोटी बातों के लिए हम अपने दोस्तों से बात करते थे, अब वही काम एआई (आर्टिफिशियल इंटैलिजैंस) कर देता है लेकिन क्या आप ने कभी सोचा है कि यह एआई हमारे दोस्तों के बीच थर्ड व्हीलिंग कर रहा है? थर्ड व्हीलिंग का मतलब होता है वह तीसरा व्यक्ति या वह चीज जो 2 लोगों के बीच में आ कर उन की बातचीत या रिश्ते को प्रभावित कर दे। जानें कैसे एआई ने दोस्तों की बातचीत को बदल दिया है और इस से दोस्ती में दूरियां कैसे बढ़ रही हैं।

पहले जब स्मार्टफोन और इंटरनैट इतना आम नहीं था, तब दोस्ती का मतलब था एक-दूसरे से मिलना, बात करना और छोटी-छोटी मदद लेना। अगर किसी को कोई जानकारी चाहिए होती तो वह अपने दोस्त से पूछता था। उदाहरण के लिए, कोई लड़का अपनी दोस्त से कहता, ‘‘अरे, आज क्या बनाऊं खाने में?’’ तो दोस्त जवाब देती, ‘‘ट्राई कर न पनीर की सब्जी, मैं बताती हूं रैसिपी।’’ इस बातचीत से न सिर्फ जानकारी मिलती बल्कि हंसी-मजाक भी होता और रिश्ता मजबूत होता था।

कोई समस्या हो, जैसे ‘‘मुझे यह मूवी देखनी है, कैसी है?’’ तो दोस्त अपना अनुभव शेयर करता। इस से दोस्ती में विश्वास बढ़ता था लेकिन अब एआई ने यह सब बदल दिया है। लोग सोचते हैं, ‘‘क्यों दोस्त को डिस्टर्ब करूं, एआई से ही पूछ लेता हूं।’’ इस से दोस्ती की अहमियत कम हो गई है। या फिर हम पहले AI से पूछ कर दोस्त से पूछते हैं। कुछ गलत होने पर कहते हैं यार AI तो ये कह रहा है। तू क्या बता रहा है। तो दोस्त कहेगा तो फिर AI से ही पूछ ले मेरे पास क्या लेने आया है। बात बढ़ते बढ़ते इतनी बढ़ जाती है की दोस्ती में दरार आने लगती है।

एआई का इस्तेमाल और उस का प्रभाव

एआई के आने से जिंदगी आसान हो गई है। गूगल असिस्टैंट, सिरी, चैटजीपीटी जैसे टूल्स किसी भी सवाल का जवाब सैकंडों में दे देते हैं लेकिन समस्या यह है कि ये टूल्स 2 दोस्तों के बीच में आ कर थर्ड व्हीलिंग करने लगते हैं।

2 दोस्त, राहुल और प्रिया, पहले हर शाम मैसेज पर बात करते थे। राहुल पूछता, ‘‘प्रिया, आज का मौसम कैसा है? बाहर निकलूं?’’ प्रिया जवाब देती, ‘‘बारिश हो रही है, घर पर रह। कल मिलते हैं।’’ लेकिन अब राहुल एआई से पूछता है, ‘‘आज का मौसम क्या है?’’ एआई बताता है, ‘‘बारिश का 70 फीसदी चांस है।’’ बस, बात खत्म। प्रिया को मैसेज नहीं जाता और धीरे-धीरे बातचीत कम हो जाती है।

दोस्त सिर्फ दोस्त नहीं होते थे, वे अनऔफिशियल गाइड, इमोशनल सपोर्ट सिस्टम और कई बार फैमिली के बाद सब से भरोसेमंद इंसान होते थे। कालेज के फौर्म भरने से ले कर नौकरी के इंटरव्यू तक, रिश्तों की उलझन से ले कर पैसों की प्लानिंग तक हर जगह दोस्त अहम भूमिका निभाते थे।लेकिन अब वही सवाल पहले एआई से पूछे जाते हैं।‘‘यह कैसे करें?’’, ‘‘क्या सही है?’’, ‘‘क्या गलत है?’’ हर सवाल का जवाब मशीन से मिल जाता है। दोस्त को मैसेज करने की जरूरत ही नहीं पड़ती।

लोग सोचते हैं कि दोस्त का एहसान क्यों लें। मतलब, क्यों किसी को परेशान करें जब एआई फ्री में जवाब दे देता है लेकिन एहसान लेने-देने से ही रिश्ते मजबूत होते हैं। कई बार किसी से अपनी फीलिंग्स शेयर करने या कुछ पूछने पर ऐसी भावना आती है कि कहीं हमारा दोस्त मजाक न उड़ाए या मुझे डंब न समझे, ऐसे में एआई सहज लगता है। एआई मशीन है, वह भावनाएं नहीं समझती। इस से दोस्ती में इमोशनल टच गायब हो जाता है।

आजकल छोटी-छोटी चीजों के लिए लोग एआई का सहारा लेते हैं जैसे रैसिपी, फिल्म सुझाव, ट्रैवल टिप्स और यहां तक कि फैशन एडवाइस तक। पहले ये सब दोस्तों से पूछा जाता था, जो बातचीत का बहाना बनता था। अब एआई ने ये सब अपने हाथ में ले लिया है। धीरे-धीरे ही सही हमारा रहन सहन पश्चिमी होता जा रहा है।

ये छोटी क्वेरीज लगती हैं, लेकिन ये दोस्ती की नींव होती हैं एआई असली ह्यूमन कनैक्शन को तोड़ देता है। लोग सोचते हैं कि एआई 24×7 उपलब्ध है, कभी थकता नहीं, कभी जज नहीं करता लेकिन दोस्त इंसान हैं, वे भावनाएं समझते हैं। एआई से बात कर के हम अकेले हो जाते हैं।

ऐसी कई स्टडीज सामने आई हैं जिन के मुताबिक युवाओं में सोशल मीडिया और एआई के कारण डिप्रैशन बढ़ रहा है। पहले दोस्तों से बात कर के समस्या सौल्व होती थी, अब एआई से। लेकिन एआई समस्या सुन कर सौल्यूशन देता है, सहानुभूति नहीं।

कैसे बैलेंस रखें

दोस्ती को बचाने के लिए बैलेंस जरूरी है। एआई का इस्तेमाल करें, लेकिन दोस्तों को भूलें नहीं। छोटी क्वेरीज का बहाना बना कर दोस्तों से बात करें। जैसे, एआई से जानकारी लें, फिर दोस्त से शेयर करें।

एआई से आउटफिट सुझाव लें, फिर दोस्त को फोटो भेज कर पूछें, ‘‘कैसा लग रहा है?’’ इस से बातचीत बढ़ेगी।

इस में कोई दोराय नहीं कि एआई हमारी जिंदगी में थर्ड व्हीलिंग कर रहा है, लेकिन हम इसे कंट्रोल कर सकते हैं। दोस्ती इंसानी रिश्ता है, उसे मशीन से न बदलें।

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