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Showing posts from February, 2026

मनाएं हेल्दी होली Celebrate a healthy Holi

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  Holi 2026: इस बार मनाएं हेल्दी होली खुशियों व उमंगों वाले खूबसूरत त्योहार में रंग में भंग न पड़े और स्वास्थ्य की दृष्टि से होली रहे सेहतमंद। होली का त्योहार उत्साह, उमंग और उल्लास का त्योहार है। इस दिन रंग-गुलाल उड़ा कर और मिठाइयां खा व खिला कर खुशियां बांटी जाती हैं। लेकिन कई बार जरा सी लापरवाही के चलते इस खूबसूरत त्योहार में रंग में भंग पड़ जाता है और खुशियों व उमंगों वाला यह त्योहार सेहत के साथ खिलवाड़ बन जाता है। 1 बनाएं हैल्दी पकवान : होली में जहां एक ओर रंगों की फुहार का लोग मजा लेते हैं वहीं दूसरी तरफ बिना मिठाइयों के होली अधूरी लगती है। वहीं, कई बार बाजार की मिलावटी मिठाइयों और गलत खान-पान के चलते सेहत की अनदेखी हो जाती है। ‘‘होली का सही मायने में मजा लेना है तो स्वाद और सेहत दोनों को ध्यान में रखते हुए होली के व्यंजन घर पर ही बनाएं। होली पर घर में बनी ठंडाई, शरबत, गुझिया, कांजी वडा, पापड़ खाएं और इस त्योहार का मजा उठाएं। अगर आप अपने बढ़ते वजन को ले कर परेशान हैं लेकिन साथ ही होली का मजा भी लेना चाहती हैं तो हर चीज खाएं लेकिन सीमित मात्रा में। ‘‘दरअसल, यह बदलता मौसम होता ...

खतरनाक रेबीज : लाइलाज रोग Dangerous rabies: an incurable disease

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  खतरनाक रेबीज : लाइलाज रोग रेबीज दुनिया की सब से खतरनाक बीमारियों में से एक है। यदि यह बीमारी किसी को होती है तो 99 फीसदी चांस है कि व्यक्ति की मौत हो जाए। ऐसी लाइलाज बीमारी से बचने के क्या हैं उपाय? रेबीज या जलान्तक (हाइड्रोफोबिया) दुनिया की सब से खतरनाक लाइलाज बीमारियों में से एक है । यह रोग मनुष्य को यदि एक बार हो जाए तो उस का बचना मुश्किल होता है ।  रेबीज लाइसो वायरस यानी विषाणु द्वारा होती है और अधिकतर कुत्तों के काटने से ही होती है परंतु यह अन्य दांत वाले प्राणियों, जैसे बिल्ली, बंदर, सियार, भेडि़या, सूअर इत्यादि के काटने से भी हो सकती है ।  इन जानवरों या प्राणियों को नियततापी (वार्म ब्लडेड) कहते हैं ।  यह रोग यदि किसी मनुष्य को हो जाए तो उस की मृत्यु निश्चित होती है ।  शायद ही विश्व में रेबीज ग्रसित कोई व्यक्ति इलाज से बचा हो । हर साल 1.7 करोड़ लोग जानवरों के काटने के शिकार होते हैं। 2021 व 2022 में 6,644 मौतें रेबीज के कारण हुईं। आवारा कुत्तों पर कंट्रोल हर शहर-गांव में न के बराबर है। लोग आवारा कुत्तों को खाना खिलाना पुण्य का काम समझते हैं और इसलिए इन क...

ठण्ड में विटामिन डी की कमी Vitamin D deficiency in winter

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  ठंड में शरीर में हो जाती है Vitamin D की कमी, तो इन फूड्स का करें सेवन ठंड में विटामिन डी की कमी होने लगती है। ऐसे में यह फूड्स आप की इस कमी को पूरा कर सकते हैं, जानिए ठंड के मौसम में ज्यादातार लोगों के शरीर में विटामिन डी की कमी होने लगती है, जिस से उन की हड्डियां तो कमजोर होती ही हैं। साथ ही शरीर के अलग-अलग हिस्सों में भी दर्द होने लगता है। ऐसे में जरूरी है कि आप अपनी डाइट में उन चीजों को शामिल करें, जो बौडी में विटामिन डी की कमी को पूरा कर सके। सर्दियों के मौसम में कुछ लोगों की हड्डियां कमजोर होने लगती है। इस के अलावा उन के शरीर के अलग-अलग हिस्सों में भी दर्द की समस्या होने लगती है। आमतौर पर इस की वजह बौडी में विटामिन डी की कमी को माना जाता है। दरअसल, सूरज की किरणों को विटामिन डी का मुख्य स्त्रोत माना जाता है और सर्दियों में धूप न के बराबर निकलती है, जिस से शरीर में विटामिन डी की कमी होने लगती है। ऐसे में जरूरी है कि शरीर में विटामिन डी की कमी पूरा करने के लिए लोग अपनी डाइट में उन फूड्स को शामिल करें। जो बौडी में विटामिन डी की कमी को पूरा कर सके। तो आइए जानते हैं उन फूड्स के ब...

करेला खाने के फायदे Benefits of eating bitter gourd

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  स्वाद में कड़वा लेकिन गुणों की खान है करेला, जानें इसे खाने के ढेरों फायदे करेले का इस्तेमाल एक नेचरल स्टेरौयड के रूप में किया जाता है क्योंकि इसमें केरेटिन नामक रसायन होता है। जो खून में शुगर का स्तर नियंत्रित रखता है। अकसर घरों में माएं-दादियां करेले के गुणों का बखान करती मिलती हैं। कई बुजुर्गों को आपने करेले का जूस मजे से पीते देखा होगा मगर करेले का नाम सुनते ही युवाओं के मुंह का जायका बिगड़ जाता है। बच्चे तो उसके नाम से ही नाक-भौं चढ़ा लेते हैं। करेले की कड़ुवाहट झेलना सबके बस की बात नहीं है। करेला भले ही एक कड़ुवी सब्जी हो, लेकिन इसमें कई गुण होते हैं। यह खून तो साफ करता ही है, साथ ही डायबीटीज के रोगियों के लिए यह बेहद फायदेमंद है। करेला डायबीटीज में अमृत की तरह काम करता है। इससे खून में शुगर लेवल कंट्रोल में रहता है। दमा और पेट के रोगियों के लिए भी यह लाभदायक है। इसमें फौस्फोरस पर्याप्त मात्रा में होता है जो कफ की शिकायत को दूर करता है। करेले का इस्तेमाल एक नेचरल स्टेरौयड के रूप में किया जाता है क्योंकि इसमें केरेटिन नामक रसायन होता है। जो खून में शुगर का स्तर नियंत्रित रखता है...

ज्यादा पसीना क्यों आता है ? Why do we sweat excessively?

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  कभी सोचा है, शरीर से क्यों निकलता है पसीना पसीना शरीर के कुछ खास हिस्सों में अधिक आता है। जैसे हमारी हथेलियां, माथा, पैर के तलवे, आर्मपिट आदि क्यों कि इन हिस्सों में स्वेटग्लैंड्स अधिक मात्रा में होते हैं। क्या आप के साथ भी कभी ऐसा हुआ है कि आप कौन्फ्रेंस रूम में खड़े हो कर प्रेजेंटेशन दे रहे हैं। सामने बौस, सीनियर्स और को-वर्कर्स बैठे हुए हैं। मीटिंग काफी महत्वपूर्ण है और आप के दिल की धड़कनें बढ़ी हुई है। हथेलियां पसीने से भीग रही है। आप हाथों को किसी तरह पोंछने का प्रयास कर रहे हैं और घबड़ाहट में आप के हाथों से नोट्स गिरते-गिरते बचता है। ऐसी परिस्थिति में न सिर्फ आप का आत्मविश्वास घटता है बल्कि देखने वाले पर आप के व्यक्तित्व को ले कर नकारात्मक प्रभाव भी  पड़ता है। यह एक सामान्य प्रक्रिया है जो अक्सर हमारे साथ होता है। यह स्ट्रेसफुल या तनावपूर्ण परिस्थितियों  की स्वाभाविक प्रतिक्रिया है। फर्स्ट डेट, इंटेंस सोशल इंगेजमेंट या किसी डेडलाइन को मिस कर देने के भय के दौरान भी कुछ इसी तरह की स्थिति महसूस होती है। कई दफा तीखे मसालेदार भोजन ,जंक फूडस, स्मोकिंग या कैफीन के अधिक प्...

छोटी आदतों का बड़ा असर Small habits have a big impact

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  Power Of Habits : छोटी आदतों का बड़ा असर छोटी आदतों का प्रभाव केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता। जब हम अपने जीवन में अनुशासन और सकारात्मकता लाते हैं, तो उस का प्रभाव हमारे परिवार, कार्यस्थल और समाज पर भी पड़ता है। उदाहरण के लिए, यदि हम प्रतिदिन ऊर्जा की बचत करें। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में, जहां समय की कमी और तनाव हर जगह है, वहां छोटी-छोटी अच्छी आदतें ही हमारे मन और भावनाओं को स्वस्थ रखती हैं। अगर हम रोज थोड़ा सा समय खुद को बेहतर बनाने, परिवार और समाज के लिए निकालें, तो जिंदगी में खुशी भी बनी रहती है और जीने का मकसद भी। आज का युग तीव्र प्रतिस्पर्धा, तनाव और भागदौड़ से भरा हुआ है। हर व्यक्ति जीवन में सफलता, संतुलन और शांति की खोज में है। लोग अकसर यह सोचते हैं कि बड़े परिवर्तन केवल किसी बड़े अवसर या उपलब्धि से आते हैं, जबकि सच्चाई यह है कि जीवन में बड़ा बदलाव छोटी-छोटी आदतों से ही प्रारंभ होता है। यही आदतें हमारे विचार, व्यवहार और व्यक्तित्व को गहराई से प्रभावित करती हैं। हर सुबह समय पर उठना, कुछ क्षण ध्यान या प्रार्थना में बिताना, दिन के कार्यों की रूपरेखा बनाना, आभार व्यक्त करना,...

भारत में जलवायु परिवर्तन Climate Change In India

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  Climate Change In India : जब भयंकर गर्मी से खत्म हो जाएगी भारत की बड़ी आबादी ऐसी विकट परिस्थिति में सब से ज्यादा मारा जाएगा गरीब आदमी क्योंकि अमीर और सक्षम लोग तो पहले ही देश छोड़ चुके होंगे। अमीरों को भविष्य में होने वाले उस विनाश का आभास अभी से है तभी तो हर साल करीब दो लाख करोड़पति भारत, पाकिस्तान और... अभी हाल में आई एक रिपोर्ट के अनुसार बेहद गर्मी और उमस के कारण अगले 83 सालों में जीने लायक नहीं रहेंगे भारत, बांग्लादेश और पाकिस्तान ।  इस रिपोर्ट के अनुसार क्लाइमेट चेंज के कारण अगले कुछ दशकों में दक्षिण एशिया का इलाका लोगों और जीवों के रहने लायक नहीं रहेगा । वैज्ञानिकों का अनुमान है कि जलवायु परिवर्तन के कारण भारत और पाकिस्तान सहित दक्षिण एशियाई देशों में इतनी गर्म हवाएं चलेंगी कि यहां जी पाना नामुमकिन हो जाएगा । जब वेट-बल्ब टेंपरेचर 35 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच जाता है, तो इंसानी शरीर गर्मी के मुताबिक खुद को अनुकूलित नहीं कर पाता। जीवों के शरीर में स्वाभाविक तौर पर अनुकूलन की क्षमता होती है। 35 डिग्री सेल्सियस वेट-बल्ब तापमान होने पर इंसानों का शरीर इतनी गर्मी से खुद को बचाने...

काले रंग की चीजें लाजवाब Black things are amazing

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  रहना चाहते हैं स्वस्थ, तो इन 11 काली चीजों को बनाएं अपनी डाइट का हिस्सा यहां काले रंग की चीजों का मामला खाने-पीने से जुड़ा है। कुदरत के खजाने में मौजूद कई काले रंग की खाने-पीने की चीजें लाजवाब खूबियों से भरपूर होती हैं। अकसर काले रंग की चीजों को हिकारत से देखा जाता है ।  इस रंग को गम का प्रतीक भी माना जाता है ।   कोई गलत काम हो गया तो  कहा जाता है कि उस का तो मुंह काला हो गया ।  काली गाडि़यों में चलने वालों की छवि गुंडे-बदमाशों की मानी जाती है ।  हराम के या दो नंबर के पैसों को काला धन कहा जाता है ।  लेकिन ऐसा भी नहीं है कि काला रंग महज बुराई या खराबी का ही प्रतीक होता है ।  यह रंग खूबियों से भी भरपूर होता है ।  काली पोशाक में सजे गोरे लोग   सुन्दर दिखाई देते हैं। जैसे एक वक्त में देवानंद फिल्म एक्टर के पीछे लोग पागल थे।  बहरहाल, यहां काले रंग की चीजों का मामला खाने-पीने से जुड़ा है ।  कुदरत के खजाने में मौजूद कई काले रंग की खाने-पीने की चीजें लाजवाब खूबियों से भरपूर होती हैं ।  ये तमाम काले खाने-पीने के सामान न सिर्फ खान...

मूत्राशय को कैसे करें कंट्रोल ? How to control the urine bladder?

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  मूत्राशय को इंटरस्टिम तकनीक से करें कंट्रोल, जानें कैसे अपने मूत्राशय पर नियंत्रण न रख पाना आम समस्या तो है पर कई बार यह शर्मिंदगी दे जाती है। लेकिन यह कोई लाइलाज समस्या नहीं, इसे नियंत्रित किया जा सकता है इंटरस्टिम तकनीक से। क्या है यह तकनीक, जानें। 2 बच्चों की 40 वर्षीय मां सुनंदा को उस समय कुछ राहत मिली जब उस ने ‘इंटरस्टिम टैक्नोलौजी’ से मूत्र असंयमता पर काबू पाया। इस से पहले सुनंदा ने कई इलाज करवाए पर फायदा बहुत कम था। जरा सी छींक, हंसी या खांसने से उस का यूरिन अनायास ही निकल आता था। उस ने अपने-आप को कहीं जाने-आने से भी रोक रखा था। आम स्थान पर इस तरह की समस्या उस के लिए शर्मनाक थी। मूत्र असंयम, दरअसल मूत्राशय पर नियंत्रण का न होना है। यह एक आम समस्या है जो अकसर खांसी, छींक आने पर आप को होती है। उस वक्त अगर आस-पास शौचालय न मिले तो मूत्र को रोक पाना असंभव हो जाता है। यह दैनिक गतिविधियों को प्रभावित करता है। लोग डाक्टर के पास जाने से संकोच करते हैं। यह बीमारी लाइलाज नहीं। समय रहते अगर इस का इलाज किया जाए तो व्यक्ति नौर्मल जिंदगी बिता सकता है। अधिकतर महिलाएं इस की शिकार होती हैं।...

गंजे लड़के – रिजैक्शन का शिकार क्यों? Bald Guys – Why Are They Rejected?

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  Hair Loss Problem Male : गंजे लड़के – रिजैक्शन का शिकार क्यों? गंजापन कोई विकलांगता नहीं है लेकिन इसे देखा इसी नजरिए से जाता है। गंजों को कई विशेषणों से नवाजा जाता है जिन में टकला, उजड़ा चमन और बंजर जमीन प्रमुख हैं। कई फिल्मों में गंजों का मजाक बनाया गया है और गंजों पर कई जोक्स भी बने हैं... क्यों कोई लड़की गंजे लड़के से शादी नहीं करना चाहती? इस सवाल का जवाब ढूंढ पाना उतना ही मुश्किल है जितना उन्हें यह समझा पाना कि जब बाकी सब ठीक-ठाक हो और मैच कर रहा हो तो महज गंजेपन के आधार पर अच्छा घरबार ठुकरा देना कोई फायदे का सौदा तो नहीं कहा जा सकता। फेसबुक पर कभी-कभार जो सलीके की पोस्ट देखने को मिलती हैं उन में से एक किन्ही सुरेंद्र सिंह पंवार की है जिस में वे लिखते हैं, ‘शादी के लिए आए गंजे लड़कों की फोटो रिजैक्ट करने वाली 90 फीसदी लड़कियों को शादी के 10 साल बाद गंजे पति के साथ ही रहना पड़ता है। यानी, सुरेंद्र सिंह के मुताबिक, शादी के 10 साल बाद पति में गंजापन आने लगता है। मुमकिन है यह आंकड़ा थोड़ा ज्यादती पेश करता हुआ लगे लेकिन रोजाना दिखने वाली इस हकीकत के लिए किसी सर्वे रिपोर्ट की दरकार नहीं कि ...