गंजे लड़के – रिजैक्शन का शिकार क्यों? Bald Guys – Why Are They Rejected?
Hair Loss Problem Male : गंजे लड़के – रिजैक्शन का शिकार क्यों?
गंजापन कोई विकलांगता नहीं है लेकिन इसे देखा इसी नजरिए से जाता है। गंजों को कई विशेषणों से नवाजा जाता है जिन में टकला, उजड़ा चमन और बंजर जमीन प्रमुख हैं। कई फिल्मों में गंजों का मजाक बनाया गया है और गंजों पर कई जोक्स भी बने हैं...
क्यों कोई लड़की गंजे लड़के से शादी नहीं करना चाहती? इस सवाल का जवाब ढूंढ पाना उतना ही मुश्किल है जितना उन्हें यह समझा पाना कि जब बाकी सब ठीक-ठाक हो और मैच कर रहा हो तो महज गंजेपन के आधार पर अच्छा घरबार ठुकरा देना कोई फायदे का सौदा तो नहीं कहा जा सकता।
फेसबुक पर कभी-कभार जो सलीके की पोस्ट देखने को मिलती हैं उन में से एक किन्ही सुरेंद्र सिंह पंवार की है जिस में वे लिखते हैं, ‘शादी के लिए आए गंजे लड़कों की फोटो रिजैक्ट करने वाली 90 फीसदी लड़कियों को शादी के 10 साल बाद गंजे पति के साथ ही रहना पड़ता है। यानी, सुरेंद्र सिंह के मुताबिक, शादी के 10 साल बाद पति में गंजापन आने लगता है। मुमकिन है यह आंकड़ा थोड़ा ज्यादती पेश करता हुआ लगे लेकिन रोजाना दिखने वाली इस हकीकत के लिए किसी सर्वे रिपोर्ट की दरकार नहीं कि 90 नहीं तो 60 फीसदी पति तो गंजेपन का शिकार होने लगते ही हैं। उन्हें देख लगता है कि अर्धगंजेपन से ज्यादा तो पूर्णगंजापन अच्छा और ठीक-ठाक लगता है।
आजकल ज्यादातर लड़कियां 30 और 35 वर्ष की उम्र के बीच शादी कर रही हैं। इस वक्त में पति की उम्र इस से थोड़ी ज्यादा ही होती है। 45 तक पहुंचते-पहुंचते अधिकतर पुरुषों के सिर की फसल उजड़ना शुरू हो जाती है। अर्थात, बाल वाला पति कोई 10-12 साल ही बाल वाला रहता है।
85 फीसदी पुरुषों के बाल 50 वर्ष की उम्र के बाद पतले होना और झड़ना शुरू हो जाते हैं। इसे मेल पैटर्न बाल्डनैस या एलोपेसिया भी कहा जाता है। हर दो में से एक पुरुष के सिर के बाल 50 साल की उम्र के बाद पतले होने लगते हैं या फिर झड़ने लगते हैं।
भारत की स्थिति इस से अलग नहीं है। एक रिपोर्ट के मुताबिक 30 से 50 साल की उम्र के बीच के 58 फीसदी युवक एजीए यानी एन्ड्रोजेनेटिक एलोपेसिया की गिरफ्त में हैं। इसे ही मेल पैटर्न बाल्डनैस कहा जाता है। तो फिर क्यों लड़कियां गंजे लड़कों से शादी नहीं करना चाहतीं, इस सवाल का दो टूक जवाब तो यह है कि यह व्यक्तिगत इच्छा और पसंद की बात है। जब लड़के बात-बात पर लड़कियों को रिजैक्ट कर सकते हैं तो इसी या किसी और आधार पर लड़कियों से यह हक नहीं छीना जा सकता।
कमी या कमजोरी नहीं गंजापन
लेकिन जिस तरह लड़कों को यह सलाह नहीं दी जाती कि वे महज हाइट या कम गोरे होने जैसी बेदम वजहों के चलते खासी शिक्षित लड़की को रिजैक्ट कर दें, ठीक उसी तरह लड़कियों को भी यह सलाह नहीं दी जा सकती कि वे महज गंजे होने के कारण अच्छेखासे कमाऊ लड़के को रिजैक्ट कर दें।
गंजापन कोई शारीरिक कमजोरी या कमी नहीं है जिसे रिजैक्शन का पैमाना बनाया या माना जाए। पुणे में एक सौफ्टवेयर कंपनी में नौकरी कर रहे भोपाल के 34 वर्षीय आदित्य सक्सेना (बदला नाम) की शादी महज इसलिए नहीं हो पा रही कि वे गंजे हैं। कालेज तक उस के बाल ठीक-ठाक थे। लेकिन पुणे में जौब जौइन करने के बाद बाल झड़ने लगे। जिन्हें रोकने के लिए उस ने कई जतन किए। एलोपेथी से ले कर होम्योपैथी और नीम-हकीमों तक का इलाज लिया लेकिन कोई फायदा न हुआ। सो, उस ने अपने गंजेपन को नियति स्वीकारते उस से समझौता कर लिया।
अब तक कई लड़कियां आदित्य को रिजैक्ट कर चुकी हैं, जबकि उस की सैलरी लगभग डेढ़ लाख रुपए महीना है। मम्मी-पापा दोनों सरकारी नौकरी से रिटायर हुए हैं जिन्होंने खासी जायदाद भोपाल में बना ली है। साथ ही, इज्जत भी खूब कमाई है। खुद आदित्य भी नेकदिल और होनहार है, पढ़ाई में हमेशा अव्वल नंबरों से पास हुआ है और नौकरी भी नामी कंपनी में करता है। उस का रंग भी साफ है और हाइट भी 6 फुट है। कमी है तो बस सिर में बालों की जिस से लड़कियां समझौता नहीं कर रहीं।
बहुत दुख होता है जब लड़कियां गंजेपन के कारण मुझे रिजैक्ट कर देती हैं,’ आदित्य बताता है, उन में से कुछ से मैं ने पूछा भी कि इस गंजेपन के अलावा कोई और कमी या ऐब मुझ में दिखता है तो उन सभी का जवाब मेरे हक में यानी न में था। एक लड़की ने तो फोन पर साफतौर पर कहा कि आप बहुत अच्छे हैं आदित्यजी। जो भी लड़की आप से शादी करेगी वो बहुत भाग्यशाली होगी लेकिन स्कूल के ज़माने से मेरी इच्छा रही है कि मेरे होने वाले पति के बाल काले, घने और घुंघराले हों। इसलिए बेमन से लेकिन पूरी विनम्रता से मैं यह रिश्ता मंजूर नहीं कर पा रही। जबकि मम्मी-पापा समझा-समझा कर हार चुके हैं कि आप से बेहतर घर-वर मुझे कहीं और नहीं मिलेगा।
तार्किक भड़ास एक गंजे युवा की
दरअसल इस लड़की से आदित्य के रिश्ते की बात थोड़ी लंबी चली थी। दोनों 2 बार डेट पर भी गए थे जहां ढेर सी बातें हुई, जिन में आदित्य का गंजापन भी शामिल था। आदित्य को भी वह लड़की भा गई थी। इसलिए उस ने अपने गंजेपन को ले कर कन्विंस कराने की कोशिश की थी। लेकिन बात बनते-बनते बिगड़ गई। लड़की के पेरैंट्स तो एक पैर पर शगुन लिए खड़े थे लेकिन, बकौल आदित्य, उस लड़की को लड़का नहीं शायद चिम्पाजी या रीछ चाहिए था। अगर उसे सिर्फ बालों से ही शादी करना थी तो मेरे घर के नौकर से कर लेती जिस के बाल न केवल घने हैं बल्कि घुंघराले भी हैं। हां, सिर्फ कुछ कमियां हैं उस में जैसे महज 10वीं पास है, उस की सैलरी सिर्फ 6 हजार रुपए महीना है और आम तौर पर वह मैला कुचैला रहता है।
तय है यह उस का गुस्सा बोल रहा था लेकिन अच्छी बात यह है कि अब वह अपने गंजेपन की हताशा और हीनता को आत्मविश्वास में तबदील कर चुका है। अब कोई भी रिश्ता आता है तो सब से पहले वह लड़की को अपना गंजा सिर दिखा देता है कि देख लो, बाकी बातें बाद में करेंगे।
लेकिन बात अभी तक कहीं बनी नहीं है जिस से उस के पेरैंट्स उस से भी ज्यादा दुखी और तनाव में रहते हैं। आदित्य की मां की मानें तो आदित्य से गए-गुजरे लड़कों की शादी ठाट से हो रही है जो इनकम, स्टेटस और एजुकेशन के अलावा दिखने में भी उस से आधे ही हैं। हां, उन के सिर पर बाल जरूर बराबर हैं। बाल होने की शर्त पर लड़कियां लड़कों की दूसरी कमियां और कमजोरियां नजरअंदाज कर रही हैं, क्या यह बात उन पर तरस खाने वाली नहीं।
यह एक मां की पीड़ा या भड़ास भर नहीं है बल्कि 62 वसंत देख चुकी एक शिक्षित नौकरीपेशा और अनुभवी महिला की लड़कियों को नसीहत या मशवरा भी है कि उन्हें लड़के में क्या-क्या देखना चाहिए। सब से पहले शिक्षा, फिर नौकरी और कमाई, फिर व्यवहार व परिवार और इस के बाद देखना हो तो कैरेक्टर और शौक वगैरह-वगैरह देखे जाने चाहिए।
सुखी जीवन का बालों से संबंध नहीं
यह अच्छी और स्वागत योग्य बात है कि लड़कियों को अपना वर चुनने की आजादी मिली है। खासतौर से नौकरी-पेशा लड़कियों को तो इंटरकास्ट मैरिज करने की भी अग्रिम इजाजत मिली हुई है। यानी, पेरैंट्स का रोल अब फायनैंसर होने का भर का रह गया है। वे अपनी बेटी को यह तक समझाने में नाकाम हो रहे हैं कि लड़के में सारे गुण हों, नौकरी और सैलरी अच्छी हो, घर-परिवार अच्छा और इज्जतदार हो तो गंजापन कोई बहुत बड़ा फैक्टर नहीं रह जाता। उस स्थिति में तो कतई नहीं जिस में, सुरेंद्र सिंह पंवार की पोस्ट के मुताबिक, 10 साल बाद गंजे हो ही जाना है।
इस में कोई शक नहीं कि गंजे लड़के पति के तौर पर लड़कियों की आखिरी प्राथमिकता हैं ठीक वैसे ही जैसे ज्यादा सांवली और साधारण शक्लओसूरत वाली लड़कियां लड़कों की आखिरी प्राथमिकता होती हैं। अब यहां यह देखा जाना जरूरी है कि कितनी सांवली लड़कियां एक बेहतर पत्नी और कितने गंजे लड़के बेहतर पति साबित हुए। अपने अनुभवों से तो कई लोग कहते मिल जाएंगे कि अधिकतर रिश्ते सफल रहे और उन का वैवाहिक जीवन भी सुखद रहा।
क्या हर वो लड़की जिस ने बाल वाले लड़के से शादी की सुखी है? इस का जवाब न में ही मिलता है। इस का मतलब यह नहीं कि बाल वाले सभी लड़के या पति ख़राब होते हैं या सभी गंजे आदर्श पति साबित होते हैं। मुमकिन है उन में भी कोई न कोई ऐब मिल जाए लेकिन जब रिस्क दोनों तरफ बराबर का है तो एक गंजेपन की बिना पर अच्छा-खासा रिश्ता ठुकरा देना बुद्धिमानी की बात या फैसला तो नहीं माना जा सकता। इस बारे में एक युवती रश्मि का कहना है, आप शादी की बात कर रहे हैं, हकीकत तो यह है कि गंजे लड़कों को लड़कियां बौयफ्रैंड बनाना भी पसंद नहीं करतीं क्योंकि उन्हें गंजे के साथ चलने, रहने और बात करने में शर्म आती है।
गंजों के प्रति पूर्वाग्रह क्यों ?
गंजापन कोई विकलांगता नहीं है लेकिन इसे देखा इसी नजरिए से जाता है। गंजों को कई विशेषणों से नवाजा जाता है जिन में टकला, उजड़ा चमन और बंजर जमीन प्रमुख हैं। कई फिल्मों में गंजों का मजाक बनाया गया है और गंजों पर कई जोक्स भी बने हैं। यानी, गंजों के प्रति पूर्वाग्रह पैदा करने और नैगेटिव नैरेटिव गढ़ने में इन का भी योगदान कमतर नहीं।
ऐसा भी नहीं है कि सिर्फ व्यक्तिगत रूप से ही गंजों को दुश्वारियां झेलनी पड़ती हों, बल्कि है ऐसा भी कि गंजे लोग हर कहीं अनदेखी और भेदभाव का शिकार होते हैं। गंजे आदमी को संक्रमित, बदबूदार, गंदा और नासमझ समझा जाता है। गंजे लोगों को जौब देने में भेदभाव होता है। हद तो यह कि प्रत्येक 6 में से एक आदमी गंजों से बात करने में हिचकता है।
इस और ऐसी कई परेशानियों को साल 2019 में अमर कौशिक निर्देशित फिल्म ‘बाला’ में बहुत गहराई से उकेरा गया था। इस फिल्म में आयुष्मान खुराना ने एक ऐसे युवा गंजे की भूमिका निभाई है जिस का मजाक गंजेपन के चलते उड़ना आम है। इस से उस का आत्मविश्वास डगमगा जाता है और गंजेपन से निजात पाने के लिए वह वही उपाय आजमाता है जो आदित्य जैसे लाखों युवा आजमाते हैं। कई उपायों के बाद भी नायक बाला के बाल वापस नहीं आते लेकिन उस की जिंदगी में एक खूबसूरत वकील लतिका यानी यामिनी गौतम आती है जिसे लुभाने के लिए बाला विग पहनने लगता है। लतिका भी बाला को पसंद करने लगती है।
जब फिल्म में खुला राज
लेकिन एक दिन उम्मीद के मुताबिक बाला के गंजेपन का राज खुल ही जाता है। उम्मीद के मुताबिक ही लतिका गंजापन झेल नहीं पाती और दोनों का ब्रेक अप हो जाता है। यानी, महज गंजेपन के चलते एक पढ़ी-लिखी युवती की धारणा बदलती है तो उसे तथाकथित समझदार ही कहा जाएगा। कल तक जिस लड़के के साथ वह रोमांटिक रिश्ते में थी, नाच-गा रही थी, घर बसाने के सपने देखने लगी थी उस की शक्ल और समझ पर निछावर थी, एक बाल न होने से यह सब उसे बेकार लगने लगता है।
ऐसा फिल्मों में ही नहीं बल्कि हकीकत में भी अकसर होता देखा गया है। कुछ अरसा पहले ही उत्तर प्रदेश के उन्नाव के सफीपुर में दिल्ली के एक दूल्हे पंकज, जो पेशे से शिक्षक था, की विग वरमाला के दौरान गिर गई तो दुलहन ने गंजे से शादी करने से मना कर दिया। नतीजतन, पंकज को बरात बड़े बेआबरू हो कर तेरे कूचे से निकले की तर्ज पर वापस दिल्ली ले जाना पड़ी। दोनों पक्षों के समझदार लोगों ने लड़की को समझाने की कोशिश की लेकिन उस के बालों में जूं तक न रेंगी।
बाला फिल्म इन्ही वजहों के चलते अच्छी बन पड़ी थी जिस में भूमि पेडनेकर भी परिणीती नाम से एक महत्त्वपूर्ण भूमिका में दिखाई दी थी जो बाला के बचपन की दोस्त है। लेकिन दोनों में कोई प्यार या रोमांस नहीं है, बस, दोस्ती है। परिणीती मामूली शक्ल वाली टिकटौक स्टार है जिस की लड़ाई सौंदर्य मानकों को ले कर है। सीधे-सीधे कहा जाए तो अमर कौशिक यह बताने में कामयाब रहे थे कि जिस वजह से साधारण चेहरे-मोहरे वाली लड़कियों की शादी नहीं होती वही स्थिति एक गंजे युवक की समाज में होती है।
लेकिन फिल्म का अंत काफी इंस्पायर करने वाला था। बाला अपनी कमी को स्वीकार लेता है और खोया हुआ आत्मविश्वास हासिल कर लेता है। यही परिणीती भी करती है और दोनों सबकुछ नजरअंदाज करते अपनी-अपनी मंजिल की तरफ बढ़ने लगते हैं। यही आम जिंदगी में होना जरूरी है कि गंजे युवा खुद को दीनहीन न समझें और खुद को साबित करते रहें तो दुनिया उन्हें सलाम करेगी।
आदित्य इन दिनों यही कर रहा है और कुछ वर्षों बाद अपनी खुद की कंपनी डालने की योजना बना रहा है। इस बाबत उस ने प्रोजैक्ट तैयार कर लिया है। शादी की बाबत उस का कहना बेहद साफ है कि जो लड़की उसे उस के गंजेपन के साथ दिल से स्वीकारेगी वही जिंदगीभर साथ दे पाएगी। हां, आकर्षक दिखने के लिए उस ने दूसरे कई गंजे युवकों की तरह चेहरे के मुताबिक दाढ़ी रखना शुरू कर दी है जिस से वह आकर्षक दिखता है और उस का गंजापन, आंशिक ही सही, ढक भी जाता है।
लेकिन उस की बातों से यह बात या मैसेज भी लड़कियों के लिए झलकता है कि वे किसी गंजे युवक को महज बालों की कमी के चलते रिजैक्ट न करें बल्कि वे देखें यह कि लड़का कितना कमाऊ, शिक्षित, स्वाभिमानी और समझदार है। जिंदगी किसी लड़के के बालों के साथ नहीं, बल्कि उस के स्वभाव के साथ काटनी है, यह बात हर लड़की को समझनी चाहिए।

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