खतरनाक हो सकता है कोलेस्ट्रॉल Cholesterol can be dangerous

 

सावधान! आपके लिए खतरनाक हो सकता है कोलेस्ट्रॉल

सवाल उठता है कि कोलेस्टराल क्या है? शरीर में इस की क्या भूमिका है तथा इस की अधिकता को क्या भोजन द्वारा नियंत्रण में रखा जा सकता है।

आज के बदलते लाइफ स्टाइल में जहां लोग अपनी सेहत के प्रति जागरुक होते जा रहे हैं, वहीं कई बीमारियां भी बढ़ती जा रही हैं। इन्हीं बीमारियों में एक बीमारी है कोलेस्टराल का बढ़ना। यह एक ऐसी बीमारी है, जिसका सीधा संबंध हमारे हृदय से है। खून में कोलेस्टराल की मात्रा बढ़ जाने से ही हृदय से संबंधित कई बीमारियां उत्पन्न हो जाती हैं। हमारे शरीर की सभी कोशिकाओं और रक्त में कोलेस्टराल मौजूद है।

सवाल उठता है कि कोलेस्टराल क्या है? शरीर में इस की क्या भूमिका है तथा इस की अधिकता को क्या सिर्फ भोजन द्वारा नियंत्रण में रखा जा सकता है अथवा हमेशा दवा का प्रयोग जरूरी है। भोजन द्वारा कोलेस्टराल की अधिकता से कैसे बचाव किया जा सकता है या उसको नियंत्रण में रखा जा सकता है, साथ ही कोलेस्टराल से जुड़े मिथ और फैक्ट्स क्या हैं, यह सब जानकारी दे रही हैं जीरकपुर के वधावा नगर स्वास्तिक क्लिनिक की डॉ के पी कौशिक

कोलेस्टराल क्या है

यह एक मोम जैसा पीला चिपचिपा पदार्थ है जो वसा के समान है पर वसा नहीं होता। यह व्यक्ति के लिवर में तैयार होता है और प्रतिदिन लिवर 1,500 मिलीग्राम कोलेस्टराल का निर्माण करता है। कोलेस्टराल लगभग 85 प्रतिशत शरीर से बनता है और 15 प्रतिशत भोजन से।

कोलेस्टराल की भूमिका

1 शरीर की जैविक क्रियाओं के संचालन में कोलेस्टराल की महत्त्वपूर्ण भूमिका है।

2 कोलेस्टराल से सेक्स हार्मोंस बनते हैं।

3 सूर्य की रोशनी के संपर्क में जब त्वचा आती है तो यह विटामिन ‘डी’ में परिवर्तित हो जाता है।

4 कोशिकाओं के कार्य संचालन में कोलेस्टराल की खास भूमिका होती है।

कोलेस्टराल नुकसानदेह कब

शरीर में कोलेस्टराल 2 तरह से बढ़ता है। एक तो ऐसा भोजन खाने से जिस में सैचुरेटेड चरबी ज्यादा होती है वह रक्त में ज्यादा कोलेस्टराल बनने का खास कारण होता है। यदि कोलेस्टराल वाला भोजन किया जाए तो उस का परिणाम दोगुना हो जाता है, क्योंकि कोलेस्टराल वाले भोजन में सैचुरेटेड चरबी ज्यादा होती है।

दूसरा कारण होता है कोलेस्टराल का शरीर में अधिक मात्रा में बनना। दोनों में से कोई भी कारण हो पर नुकसान शरीर को ही उठाना पड़ता है, क्योंकि कोलेस्टराल के बढ़ने से सिर्फ हृदय रोग ही नहीं होता बल्कि मोटापा, हाई बल्डप्रेशर, डायबिटीज जैसी बीमारियां भी हो जाती हैं।

कोलेस्टराल का पता कैसे लगाएं

शरीर में कोलेस्टराल की कितनी मात्रा सही है और कितनी नहीं इस के लिए चिकित्सक लिपिड प्रोफाइल टेस्ट कराते हैं। इस से प्राप्त आंकड़े शरीर में कोलेस्टराल के स्तर को दर्शाते हैं। वैसे आमतौर पर कहा जाता है कि यदि रक्त में कोलेस्टराल की मात्रा 200 मिलीग्राम प्रति डेसीलिटर से कम है तो इस का स्तर सामान्य माना जाता है और यदि इस से ज्यादा है तो सावधानी बरतने की जरूरत होती है। वैसे निम्न वजहें हों तो डाक्टर से राय ले कर टैस्ट करा लेना चाहिए :

1 हाईब्लडप्रेशर, मोटापा या थायराइड जैसी कोई समस्या हो।

2 हृदय रोग का पारिवारिक इतिहास हो।

3 रक्त में कोलेस्टराल के उच्च स्तर का पारिवारिक इतिहास हो।

4 पलकों पर हलके क्रीम कलर के धब्बों के रूप में लिपिड की परत हो।

5 ज्यादा शराब का सेवन या परिवार नियोजन के लिए गोलियां लेने की हिस्ट्री हो।

कोलेस्टराल के प्रकार

रक्त में 2 तरह का कोलेस्टराल पाया जाता है। एक एलडीएल (लो डेंसिटी लाइपोप्रोटिंस), जिसे खराब कोलेस्टराल कहा जाता है। रक्त में इस के बढ़ने के मुख्य कारण होते हैं संतृप्त वसा का अधिक सेवन। कोलेस्टरालयुक्त आहार, लिवर में कोलेस्टराल का अधिक बनना, चीनी, शराब का अधिक सेवन आदि। कोलेस्टराल का दूसरा प्रकार एचडीएल (हाई डेंसिटी लाइपोप्रोटिंस), जिसे अच्छा कोलेस्टराल कहा जाता है। जब रक्त में बुरे कोलेस्टराल की अधिकता हो जाती है और अच्छा कोलेस्टराल कम हो जाता है तभी हृदय रोग या अन्य बीमारियों से शरीर घिर जाता है।

अत: बेकार कोलेस्टराल को कम कर के तथा अच्छे कोलेस्टराल को बढ़ा कर रक्त में इस के स्तर को सामान्य या कम किया जा सकता है वह भी सही भोजन का चुनाव कर के। भोजन के सही चुनाव के साथ-साथ कैलोरी भी जरूरी है।

उपयुक्त तेल का चयन करें

कोलेस्टराल को भोजन द्वारा नियंत्रित करने के लिए जरूरी है कि आप जो तेल और चरबी खाते हैं उस के बारे में जान लें तभी अपने भोजन को ज्यादा वसा से दूर रख पाएंगे। मुख्यत: तेल व चरबी को 2 भागों में बांटा जा सकता है : एक, सैचुरेटेड फैट, दूसरा, अनसैचुरेटेड फैट।

सैचुरेटेड फैट यानी संतृप्त वसा की बात करें तो यह बल्ड कोलेस्टराल को बढ़ाने वाला होता है। यह पशुजन्य खाद्य पदार्थों से प्राप्त वसा जैसे मक्खन, घी, दूध, चीज, क्रीम आदि में पाया जाता है। कुछ तेल जैसे नारियल का तेल, पाम आयल में भी सैचुरेटेड फैट होता है। सामान्य तापक्रम पर यह फैट जमे हुए होते हैं। अत: इन का सेवन 5 से 10 प्रतिशत से अधिक नहीं करना चाहिए।

अब हम अनसैचुरेटेड फैट की बात करें तो यह कोलेस्टराल को कम करने में सहायक होते हैं पर यह भी 2 प्रकार के होते हैं। एक, मोनो अनसैचुरेटेड फैट और दूसरा, पौली अनसैचुरेटेड फैट।

मोनो अनसैचुरेटेड फैट स्वास्थ्य की दृष्टि से सर्वोत्तम हैं क्योंकि ये खराब कोलेस्टराल को कम करते हैं। इस में जैतून का तेल बढि़या होता है क्योंकि यह ज्यादा गरम होने पर भी सैचुरेटेड नहीं होता है। रेपसीड आयल, तिल का तेल आदि भी मोनो अनसैचुरेटेड फैट की श्रेणी में आते हैं।

पौली अनसैचुरेटेड फैट कम लाभप्रद है पर इस में ओमेगा 3 और ओमेगा 6 पाए जाते हैं जो हृदय के लिए लाभकारी हैं। ये मुख्यत: सूरजमुखी के तेल, मक्की के तेल, सोयाबीन के तेल आदि में पाए जाते हैं।

कहने का मतलब है कि कोलेस्टराल के स्तर को नियंत्रण में रखने के लिए वानस्पतिक तेलों का प्रयोग करना चाहिए। यह कोलेस्टराल रहित होते हैं और इस में मूफा और पूफा की मात्रा अधिक होती है। वजन घटाने व कोलेस्टराल को नियंत्रण करने के लिए तेल का प्रयोग 25 से 30 प्रतिशत कैलोरी से अधिक नहीं करना चाहिए।

मेवों का सेवन करें सीमित मात्रा में

मेवों में कोलेस्टराल नहीं होता है पर वसा की मात्रा अधिक होती है। अत: काजू, मूंगफली, अखरोट और बादाम का सेवन एक सीमित मात्रा में किया जा सकता है। ये दिल की बीमारियों के लिए बेहद मुफीद हैं क्योंकि इन में मिनरल सेलेनियम नामक तत्त्व पाया जाता है। शरीर में इस अत्यंत उपयोगी मिनरल की कमी नहीं होनी चाहिए अत: संभव हो तो रोज मुट्ठी भर मेवा का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए।

फल, सब्जी अनाज और दालों का सेवन खूब करें

संतरे, लाल और पीले रंग के फल, सब्जियां और गहरे रंग की बेरीज का सेवन ज्यादा से ज्यादा करना चाहिए। छिलकेदार दालें, चोकरयुक्त आटा, साबुत अनाज, दलिया, ईसबगोल आदि में घुलनशील फाइबर खूब पाए जाते हैं। इसी तरह सेब, नाशपाती में भी खूब घुलनशील फाइबर पाए जाते हैं। यह घुलनशील फाइबर कोलेस्टराल को बांध लेते हैं और शरीर में उस के जज्ब होने की क्रिया पर रोक लगा देते हैं।

मीठे और साफ्ट ड्रिंक्स से करें परहेज

मीठी चीजों जैसे केक, पेस्ट्री, मुरब्बा, चाकलेट, जैम, शहद और कोल्ड ड्रिंक्स आदि से दूर रहें क्योंकि इन सब में कैलोरीज बहुत होती है। कहने का मतलब है कि चीनी में सरल कार्बोज के अतिरिक्त अन्य कोई पोषक तत्त्व नहीं होता है। इस के अत्यधिक सेवन से ड्राइग्लिसरिन का स्तर बढ़ जाता है साथ ही वजन में भी अनचाही वृद्धि होती है। अत: वजन पर नियंत्रण रखने के लिए मीठी चीजों से दूर रहें। ध्यान रहे, कुछ कंदमूल वाली सब्जियां जैसे शकरकंदी, चुकंदर आदि भी कम इस्तेमाल करें।

कच्चा लहसुन जरूर खाएं

अपने खाने में लहसुन का इस्तेमाल जरूर करें. यह हृदय संबंधी रोगों में काफी लाभदायक रहता है। दिन में कम से कम एक जवा लहसुन सूप, कैसररोल्स और सलाद के साथ लें अथवा एक जवा लहसुन बिना चबाए पानी के साथ सुबह-सवेरे निगल जाएं। इस के सेवन से कोलेस्टराल के स्तर में गिरावट आती है साथ ही खून के थक्के जमने की प्रक्रिया भी धीमी पड़ जाती है।

सलाद खूब खाएं

सिर्फ भोजन के साथ ही सलाद का प्रयोग न करें बल्कि जब भी भूख लगे तो गाजर, मूली, ककड़ी, खीरा, प्याज, टमाटर आदि खाएं। यह अल्पाहार के लिए अच्छा विकल्प है। इन का नियमित सेवन खराब कोलेस्टराल स्तर में गिरावट लाता है।

मांसाहार का सेवन न के बराबर करें

कोलेस्टराल पर नियंत्रण रखने के लिए जरूरी है कि मांस का सेवन न करें। मांस खासकर अंगों का मांस जैसे सुअर की चरबी, कलेजी, मुर्गा, अंडे का पीला भाग न खाएं। यह सभी कोलेस्टराल से भरपूर होते हैं। मांसाहारी मछली खा सकते हैं क्योंकि उस में ओमेगा फैटी एसिड पाए जाते हैं जो खून में विद्यमान हानिकारक ट्राइग्लिसराइड की मात्रा को घटाते हैं।

जंक फूड से करें तौबा

देशी-विदेशी जंक और फास्ट फूड जैसे छोले-भठूरे, बर्गर, कचौड़ी, आलू की टिक्की, समोसे, पिज्जा से भी नाता तोड़ दें।

व्यायाम जरूर करें

प्रतिदिन 30 से 45 मिनट एक्सरसाइज जरूर करें। इस से रक्त में से वसा शरीर से बाहर निकलने की क्षमता में वृद्धि होती है. वसा अधिक देर रक्त में टिक नहीं पाती।

उपरोक्त सावधानियां के अलावा सदैव खुश व प्रसन्न रहने की कोशिश करें। धूम्रपान न करें और न ही शराब का सेवन करें।

कभी-कभी जीवनशैली में बदलाव के बावजूद कोलेस्टराल का स्तर कम नहीं होता, तो डॉक्टर की सलाह से दवा ले कर उस को कम करना पड़ता है। जरूरी बात यह है कि सावधानी बरती जाएगी तो हमारा हृदय भी ज्यादा समय तक सुरक्षित रहते हुए सही काम करेगा।

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डॉ. के पी कौशिक

आनुवंशिक मांसपेशी विकार Genetic Muscle Disorder