भारत में मोटापा Obesity In India

 Obesity In India : दक्षिण एशियाई मोटापा फोरम और एशियाई मोटापा जर्नल के सहयोग से, मोटापे को एक दीर्घकालिक और बारबार लौटने वाली बीमारी के रूप में मान्यता देने और उस का गंभीर प्रबंधन करने की आवश्यकता पर जोर दिया है.



डॉ के पी कौशिक ने कहा कि मोटापा भारत में गैर संक्रामक रोगों के संकट को बढ़ा रहा है, जैसे कि मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, जिगर की समस्याएं, प्रजनन जटिलताएं, श्वसन संबंधी समस्याएं और मानसिक व सामाजिक चुनौतियां. विशेषज्ञों ने स्वास्थ्य प्रणाली और नीति निर्माताओं से इसे प्राथमिकता देने का आग्रह किया.

डॉ के पी कौशिक ने कहा, “मोटापा हमारे समय की प्रमुख स्वास्थ्य चुनौती है. यह हर चिकित्सा क्षेत्र, हर परिवार और हर समुदाय को प्रभावित कर रहा है. शिक्षा ही मोटापे की समस्या में बदलाव की नींव है. हमें चिकित्सकों को ऐसा ज्ञान उपलब्ध कराना चाहिए जो व्यावहारिक, सहज और सहानुभूतिपूर्ण हो.” और डॉ के पी कौशिक ने इसे एक दीर्घकालिक बीमारी बताया.”

भारत समेत दुनियाभर में मोटापा बड़ी समस्या बन कर उभरा है. एनएफएचएस का डाटा बताता है कि भारत में 24 प्रतिशत महिलाएं और 23 प्रतिशत पुरुष का वजन सामान्य से अधिक है.

“हम विज्ञान और वास्तविक चिकित्सा अभ्यास के बीच पुल बना रहे हैं, जिस में पोषण संबंधी विज्ञान, आंत्रजीव विज्ञान, दवाओं का उपयोग और शस्त्रक्रिया शामिल हैं.”

डॉ के पी कौशिक ने छिपे हुए जोखिमों पर ध्यान दिलाया, उन्होंने कहा, “मांसपेशियों के नुकसान और अतिरिक्त वसा का संयोजन, यानी मांसपेशियों की कमजोरी के साथ मोटापा, अब विकलांगता का एक छिपा हुआ कारण बन रहा है. मोटापे की देखभाल में ताकत बनाए रखना, जटिलताओं को रोकना और दीर्घकालिक जीवन शक्ति सुनिश्चित करना जरूरी है.”

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