ह्रदय रोग में घरेलु नुस्खे Home remedies for heart disease

                                 ह्रदय रोग में घरेलु नुस्खे


1. लीची का रस कुछ दिनों तक नियमित पीने से ह्रदय की धड़कन सामान्य होती है।

2. आंवला रस में एक नींबू का रस निचोड़कर पीना ह्रदय रोगी के लिए लाभकारी है।  आंवले के रस में मकोय (रसभरी) का रस मिलाकर पीना ह्रदय रोगों में हितकर है।

3. दिल की धड़कन बढ़ने पर गाजर का रस पीना लाभदायी है अथवा गाजर को उबालकर उसे रातभर खुले आकाश में रख दें। सुबह उसमे गुलाब या केवड़े का अर्क और मिश्री रोगी को खिलाने से फायदा होता है।

4. मुनक्का, बड़ी हरड़ का छिलका और शक्कर मिलाकर पीसकर ३-३ ग्राम ठंडे पानी से सेवन करने से ह्रदय रोग में लाभ होता है।

5. किशमिश को गुलाब जल में भिगोकर खाने से तथा साथ में गुलाबजल पीने से ह्रदय रोग में लाभ होता है। ह्रदय रोगियों के लिए नारियल पानी लाभकारी होता है। ह्रदय रोगी की घबराहट को दूर करने के लिए अमरुद को शहद के साथ पिलाएं।

6. सेब का रस १०० मिलीलीटर और गजवान अर्क ५० मिलीलीटर मिलाकर पिलाना ह्रदय रोगी के लिए हितकर है। फालसे के रस में सोंठ चूर्ण ५०० मिलीग्राम मिलाकर सेवन करने से ह्रदय के विकार में लाभ मिलता है। गजवान (Gazwan) एक जड़ी-बूटी है, जिसे गोजिह्वा (Onosma bracteatum) या बोरेज (Borage) के फूल के रूप में भी जाना जाता है, जो आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा में उपयोग होती है, खासकर हृदय, श्वसन, और पाचन संबंधी समस्याओं के लिए, यह शरीर को ठंडक देने और पित्त को शांत करने के लिए प्रसिद्ध है, और इसके अर्क (Ark) और खमीरा (Khamira) जैसे उत्पाद मिलते हैं।

7. दो पके टमाटर का रस निकालकर उसमे सम मात्रा में पानी मिलाकर १ ग्राम अर्जुन छाल चूर्ण मिलाकर
पिलाने से ह्रदय रोग में लाभ होता है।

8. शहतूत के सेवन से ह्रदय की दुर्बलता दूर होती है। आंवले के मुरब्बे के साथ शहतूत का रस पीने से
हृदयरोगी को शांति मिलती है।

9. तुलसी के साथ पत्ते, चार काली मिर्च, चार बादाम, सबको ठंडाई की तरह पीसकर आधा कप पानी में
प्रतिदिन पीने से ह्रदय रोग में लाभ होता है।

10. रामबाण घरेलु नुस्खा---------
150-200 ग्राम लौकी को बीज सहित पीसकर उसका रस निकाल लें। इसमें लहसून 3 कली, 5-6 तुलसी व
पुदीना की पत्तियां मिलाएं। तैयार रस में उतनी ही मात्रा में पानी डालें। थोड़ा सेंधा नमक, काली मिर्च का पाउडर
मिलाकर नित्य सेवन करें। 

11. प्रतिदिन तीन से चार कली लहसून का सेवन करने पर कोलेस्ट्रोल का स्तर घटता है।

12. अर्जुन छाल 100 ग्राम, दाल चीनी व लेंडीपीपली 50-50 ग्राम पीसकर मिलाकर रखें। प्रतिदिन सुबह 2
कली लहसून 1 कप दूध व 1 कप पानी मिलाकर उबालें। 1 कप काढ़ा शेष रहने तक उबालें। तत्पश्चात
छानकर खाली पेट पियें। इस काढ़े के आधे घंटे बाद चाय या अन्य नाश्ता वगैरह लें। हायपर कोलेस्ट्रॉल व
हृदयरोग के लिए अद्भुत नुस्खा है।

13. सूखे आंवले का चूर्ण व सममात्रा में मिश्री पीसकर मिलाकर रखें व नित्य सुबह १ चम्मच खाली पेट लेने से
ह्रदय रोग में लाभ होता है।  विशेषता ह्रदय की धड़कन, ह्रदय की कमजोरी, दिल का फेल हो जाना इत्यादि ह्रदय
रोग में अद्भुत नुस्खा है।

14. अपने BMI का पता करें। इससे सही मात्रा में वजन कम करने में मदद मिलेगी। BMI की सामान्य रेंज 18.5
से 24.9 के बीच मानी जाती है। कमर वाले हिस्से नापना सबसे जरुरी होता है। क्योंकि यह ह्रदय रोगों से जुड़े
खतरों का संकेत देता है। यदि आपके हिप वाले हिस्से से अधिक चर्बी पेट और कमर के आसपास है तो आपको
ह्रदय रोगों और टाइप 2 डायबिटीज़ का ख़तरा अधिक है। महिलाओं में 35 इंच से अधिक और पुरुषों में 40 इंच
से अधिक कमर का आकार खतरे का संकेत देती है। यदि आप ओवरवेट हैं तो 3 से 5 प्रतिशत तक वजन कम
करने से ही ट्राइग्लिसराइड, ब्लड ग्लूकोज़ का स्तर कम हो जाता है और टाइप 2 डाइबिटीज का खतरा भी।

ह्रदय रोग से बचाव के तीन सूत्रों पर ध्यान दें। मानसिक तनाव व ह्रदय रोग से मुक्ति के लिए 3 सूत्रों पर ध्यान दें।
1. आहार 2. व्यायाम 3. मैडिटेशन (तनाव से मुक्ति)
आहार पर नियंत्रण रखना सबसे महत्वपूर्ण सूत्र है। अन्यथा जो आहार हमारे रोगों को बढ़ावा दें ऐसे आहार का क्या
फायदा? उम्र के 30-35 वर्ष पश्चात आहार में तेल, घी का प्रयोग बहुत कम कर दें। कच्ची हरी सब्जियां व फल का
सेवन अधिक करें। दूध के सम्बन्ध में कहा गया है हमारी शारीरिक वृद्धि पूर्ण होने पर शरीर को दूध की आवश्यकता
नहीं नहीं रहती। दूध प्राणीजन्य पदार्थ होने के कारण उसमें सनिग्ध पदार्थ अधिक होता है। अतः दूध व मांसाहार
का सेवन न करें। दो समय के भारतीय आहार के अलावा जो कुछ बीच में खाया जाता है उसे रोकना चाहिए। आहार
पर नियंत्रण करने पर शरीर की अनेक तकलीफें कम हो जाती हैं। आहार के पश्चात व्यायाम का अपना महत्व है।
हम  स्वस्थ रहने पर व्यायाम पर ध्यान नहीं देते लेकिन जब शरीर में कोई तकलीफ होती है तो हमें लगता है व्यायाम
करके हम जल्दी ठीक हो जाए ऐसा संभव नहीं है दरअसल हमें व्यायाम स्वस्थ अवस्था से ही प्रारम्भ कर देना
चाहिए। 
व्यायाम के साथ योगासन करने से ज्यादा फायदा होता है। सप्ताह में 3 घंटे व्यायाम को जरूरदेना चाहिए। योगासन व्यायाम योग्य मार्गदर्शन में करना आवश्यक है। तीसरा सूत्र तनाव से मुक्ति प्राप्त करने का प्रयत्न। इसके लिए अनेक मार्ग उपलब्ध हैं। ध्यान, धारणा, ईश्वर
चिंतन व प्राणायाम ह्रदय रोग निवारण के लिए ध्यान का अत्यंत महत्व है। उत्तम जीवन जीने के लिए अध्यात्म
प्रवृत्ति का होना आवश्यक है। भजन करने से ब्लड प्रेशर कम होता है। प्राणायाम से भी तनाव दूर होता है, इसके
अलावा प्राणायाम से मन एकाग्र, बुद्धि व स्मरणशक्ति बढ़ती है। मन पर नियंत्रण प्राप्त होता है। इच्छाशक्ति
बढ़ती है। स्वस्थ रहने के लिए कोई हॉबी होना जरुरी है, समय निकालकर उस हॉबी को जरूर करना चाहिए। छोटी
छोटी घटना में आनंद की खोज करें। हमेशा हँसते मुस्कुराते रहें। हसने से मन की चिंताएं दूर होती हैं। निराशा दूर
होकर स्वच्छ विचार आते हैं। अतः ना केवल ह्रदय रोगी बल्कि सभी को इस जीवन शैली में इन तीन सूत्रों का
पालन करना चाहिए।

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डॉ. के पी कौशिक

आनुवंशिक मांसपेशी विकार Genetic Muscle Disorder