पार्किंसन Parkinson

पार्किंसन की बीमारी मूवमेंट सबंधी एक विकार या डिसऑर्डर है जिसमें दिमाग से हाथ या पैर तक पहुंचने वाली नसें या तंत्रिका काम करने में असमर्थ हो जाती हैं। इसमें व्यक्ति का अपने हाथ पर नियंत्राण बहुत कम हो जाता है। आमतौर पर जब दिमाग को संदेश देने वाला डोपामाइन का स्तर कम हो जाता है, तब यह बीमारी होती है। हालांकि पार्किंसन बीमारी का विकास कैसे होता है इसका अब तक पता नहीं चला है। लेकिन विशेषज्ञ इस बात पर सहमत हैं कि पार्किंसन के लिए आनुवांशिक कारण के अलावा पर्यावरण की विषाक्तता भी जिम्मेदार है।


पार्किंसन रोग न्यूरोलॉजिकल सिस्टम का गंभीर रोग है, जो शरीर की गतिविधियों को प्रभावित करता है। शुरूआत में कोई लक्षण दिखाई नहीं देते हैं या ऐसे लक्षण जिन पर मुश्किल से ही ध्यान जाता है लेकिन यह बीमारी गंभीर होती जाती है। दरअसल वृद्धावस्था से अंगों में आई क्षीणता के कारण शरीर अनेक रोगों से घिर जाता है। इनमें कम्पवात एक ऐसा रोग है, जिसमें रोगी धीरे-धीरे लाचार हो जाता है क्योंकि इसमें हाथ-पैर में कंपन के कारण वह कोई काम ठीक प्रकार से नहीं कर पाता। कम्प का अर्थ होता है कांपना, जिसे आम भाषा में हिलना या हिलते रहना भी कहते हैं यह वात प्रकोप से होता है, इसलिए इसे कम्पवात कहते हैं।

कंपवात स्नायु संस्थान का रोग है। इसमें मांसपेशियों से मस्तिष्क का नियंत्रण हट जाता है, जिससे शरीर में कंपन की शिकायत शुरू हो जाती है। चूंकि मस्तिष्क ही शरीर के प्रत्येक कार्य को नियंत्रित करता है, इसलिए आयु के बढ़ने, रोग या हानिकारक तत्वों के कारण मस्तिष्क में परिवर्तन होते हैं, जो अनेक रोगों का कारण बन जाते हैं। कम्पवात भी इन्हीं कारणों से उत्पन्न होता है। कहने का तात्पर्य यह है कि कम्पवात एक मस्तिष्क गत रोग का लक्षण है। वैसे तो 60-65 वर्ष की आयु में स्त्री या पुरुष कम्पवात रोग से ग्रस्त होते हैं, लेकिन कभी-कभी स्नायु विकारों से ग्रस्त परिवारों के बच्चे भी इस रोग के शिकार हो जाते हैं। कुछ शास्त्रज्ञों के मतानुसार यह रोग नहीं अपितु मस्तिष्कजन्य विकारों में होने वाला उपद्रव है। यह महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों में अधिक होता है। वृद्धावस्था में 50 वर्ष के बाद लगभग 1 प्रतिशत व्यक्ति में कंपवात रोग पाया जाया जाता है, किंतु यह आवश्यक नहीं कि वृद्धावस्था में ही कंपवात होता है, यह रोग मध्यमायु में भी हो सकता है। 1817 में एक अंग्रेज चिकित्सक जेम्स पार्किन्सन ने इस रोग की ओर ध्यान आकृष्ट किया, अतः तब से यह पार्किन्सन नामक रोग से जाना जाता हैं। विश्व प्रसिद्ध बॉक्सर श्री मोहम्मद अली इस रोग से ग्रस्त हैं, इस तरह अनेक विश्व विख्यात हस्तियों में भी यह रोग पाया गया है। अतः यह कह सकते हैं कि कंपवात के रोगी सामान्य व सम्मानित जीवन व्यतीत कर सकते हैं। कंपवात रोग के मुख्य कारण बहुत ही सामान्य व अक्सर नजरअंदाज कर दिए जाने योग्य होते हैं। एक सामान्य व्यक्ति में 70-80 वर्ष की आयु में मस्तिष्क कोशिकाओं का क्षतिग्रस्त या कमजोर होना आरंभ हो जाता है, जिसके कारण कम्पवात रोग की तरह शारीरिक एवं मानसिक लक्षण देखे जाते हैं। किंतु इसे उम्र आदि कारणों को ध्यान में रखते हुए वृद्धावस्था की एक सामान्य प्रक्रिया माना जाता है। अतः इसमें कोई शेष चिकित्सा कराने की भी आवश्यकता नहीं होती।

जानकारी Dr. G. M. Mamtani M. D. (Ayurveda Panchakarma Specialist) जी द्वारा दी गई हैं।



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