एड़ी का दर्द Heel Pain
महिलाओं में होने वाली प्रमुख तकलीफों में से एक तकलीफ है एड़ी का दर्द। एड़ी हमारे पैर का एक छोटा व महत्वपूर्ण हिस्सा है जो छोटी-छोटी हड्डियों से मिलकर बनता है जो पीछे की तरफ या नीचे की तरफ स्थित होती है। एड़ी वह हिस्सा है जो जमीन या जूते के इनसोल के साथ सबसे पहले संपर्क बनाता है और इस पर हमारे वजन से कई गुना ज्यादा बल लगता है। एड़ी में दर्द अधिकांश महिलाओं की एक आम शिकायत है, जिसमें एड़ी की हड्डी में तेज दर्द उठता है और चाहे इसकी गंभीरता कितनी भी हो, यह बहुत परेशान करनेवाला और सीमित करनेवाला हो सकता है। एड़ी के दर्द की वजह से खड़े होने या चलने में दिक्कत आती है। एड़ी में होने वाला दर्द रोगी व्यक्ति को बैचेन कर देता है। पैरों के द्वारा ही चलना, घूमना, दौड़ना, खड़े होना, सीढ़ियां चढ़ना आदि क्रियाएं होती है। यदि एड़ी में दर्द है तो उपरोक्त क्रियाएं कष्टकारक हो जाती है। एड़ी में दर्द को आयुर्वेद में पर्ष्णिशूल तथा आधुनिक चिकित्सा शास्त्र में प्लांटर फेसिटिस (Planter Fascitis) कहा जाता है
एड़ी में दर्द से राहत पाने के लिए ये उपाय अपनाए जा सकते हैं:- एक बाल्टी में बर्फ का ठण्डा पानी लेकर उसमें एक मिनट तक एड़ी को डुबाएं, फिर नमक मिले गुनगुने पानी में तीन मिनट तक एड़ी को डुबोएं। ऐसे बारी-बारी से डुबाएं। ऐसा 15 से 20 मिनट तक प्रातःव रात्रि में करने से एड़ी के दर्द में आराम मिलता है। एरोबिक्स तथा तैराकी एड़ी के दर्द को दूर करने में मददगार साबित हो सकती है। एड़ी में चोट लगने पर एड़ी की दस मिनट तक बर्फ से मालिश करनी चाहिए। सुबह उठते ही पिंडलियों (Calf Muscles) को खींचे। इससे एड़ी के दर्द में राहत मिलती है। यह क्रिया दिन में 30 सेंकड के लिए 10 बार करनी चाहिए।
आराम करें और एड़ी में दर्द बढ़ाने वाले कारणों से बचना चाहिए जैसे -सीढ़ियां चढ़ना-उतरना, ज्यादा चलना, पहाड़ों पर चढ़ना, भारी सामान उठाना, उबड़-खाबड़ रास्ते पर चलना आदि। एड़ी के दर्द से छुटकारा पाने के लिए पौष्टिक आहार लेना चाहिए। शरीर का वजन नियंत्रित रखें क्योंकि बढ़ा हुआ वजन एड़ी पर दबाव डालता है, जो एड़ी के दर्द का कारण बनता है। महिलाएं फ्लैट सेन्डिल या जूते पहनें, हील वाली सेन्डिल या जूते पहनें। घर में पहनने वाली चप्पल में भी हील का प्रयोग न करें। आजकल एड़ी के दर्द को दूर करने के लिए विशेष जूते भी उपलब्ध है। नंगे पाँव बिल्कुल न रहें। रात को सोते समय एड़ी के नीचे तकिया रखकर सोएं। किसी ऊंची जगह पर बैठकर लटकाकर पैरों के पंजों को गोल-गोल कई बार घुमाएं। रोज नमक के गर्म पानी में पैर चलाने की क्रिया करें।
आयुर्वेदिक उपचार:- आयुर्वेद में एड़ी के दर्द के उपचार के लिए कुछ जड़ी बूटियों और औषधियों जैसे चित्रक, रास्ना, अरंडी, सोंठ चूर्ण, अश्वगंधा चूर्ण, अजमोदादि चूर्ण, नरसिहं चूर्ण, योगराज गुग्गुल, सिहंनाद गुग्गुल, त्रिफला गुग्गुल, लाक्षादि गुग्गुल, कांचनार गुग्गुल, श्रृंग भस्म, वातविध्वसंक रस, महारास्नादि काढ़ा एवं दशमलूारिष्ट तथा एरंड तेल, महाविषगर्भ तेल, महानारायण तेल का इस्तेमाल किया जाता है। औषधीय उपचार के साथ पंचकर्म से भी एड़ी के दर्द में आराम मिलता है। एड़ी में दर्द के उपचार की आयर्वेुदिक प्रक्रियाओं में अभ्यंग (तेल मालिश), स्वेदन (पसीना निकालने की विधि), विरेचन (दस्त की विधि), बस्ती (एनिमा), रक्तमोक्षण (खून निकालने की विधि), लेप (प्रभावित हिस्से पर लेप लगाने की विधि ) और अग्नि कर्म (पंचधातु से निर्मित शलाका के द्वारा प्रभावित हिस्से को जलाना) शामिल हैं। उपरोक्त औषधीय तथा प्रक्रियाओं का प्रयोग कुशल आयुर्वेदिक चिकित्सक के परामर्श अनुसार तथा देखरेख में ही करना चाहिए।


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