कार्पेल टनल सिन्ड्रोम Carpal Tunnel Syndrome

जिन व्यक्तियों के हाथ में सुन्नता, झुनझुनी आती है, हाथ में दर्द होता है, कमजोरी आती है, उन्हें अपने डॉक्टर से परीक्षण कराना चाहिए क्योकि हो सकता है कि वे कार्पेल टनल सिन्ड्रोम नाम की व्याधि से ग्रस्त हो।

ये कार्पेल टनल सिन्ड्रोम होता क्या है? आइये इसके बारे में जानकारी हासिल करते हैं। कार्पेल याने कलाई। हमारी आठ छोटी हड्डियों से निर्मित होती हैं, जो हाथ को अग्रभाग से जोड़ती हैं। कार्पेल टनल सिन्ड्रोम तब होता है, जब टनल सँकरी हो जाती है,जिससे मिडियन नर्व पर दबाव पड़ता है फलस्वरूप हाथ में सुन्नता, झुनझुनी, दर्द, कमजोरी होने लगती है। मिडियन नर्व अंगूठे, तर्जनी, मध्यमा और अनामिका के हिस्से में संवेदना को नियंत्रित करती है अतः लक्षण भी न्यून-अधिक रूप में यहीं पर ज्यादा अनुभव में आते हैं। पुरूषों की तुलना में कार्पेल टनल सिन्ड्रोम महिलाओें में अधिक मिलता है और विशेष रूप से 40-60 वर्ष के आयु में अधिक पाया जाता है। स्थूल व्यक्तियों में भी इस व्याधि का खतरा बढ़ जाता है। कभी-कभी गर्भावस्था के दौरान भी यह समस्या हो सकती है और बच्चे के जन्म के पश्चात ठीक हो जाती है। अधिक समय तक अधिक दबाव के चलते कभी-कभी किसी रोगी में स्थायी रूप से हो सकता है। इसलिये इस व्याधि के शुरूवात में ही परीक्षण और उपचार करने से स्थाई रोग से बचा जा सकता है।

कारण:- 

  1. कलाई में मोच लगना
  2. कलाई की हड्डी का फ्रॅक्चर होना 
  3. लगातार एक जैसी क्रिया करना जैसे-टायपिंग, मशीन पर एक जैसा ज्यादा देर काम करना, जिसमें वायब्रेशन्स होते रहता है।
  4. कलाई में ऐसा महसूस होना जैसे- गर्भावस्था या रजोनिवृत्ति काल में होता है।
  5. मधुमेह, थायराईड जैसे व्याधियों में भी कार्पेल टनल सिन्ड्रोम की संभावना बढ़ जाती है।
  6. गंगलिऑन सिस्ट (ganglion cyst) से भी कुछ रूग्णों में कार्पेल टनल सिन्ड्रोम हो जाता है। 
  7. कलाई की अस्थि संधि Dislocate होने पर भी यह बीमारी हो सकती है।

लक्षण:- 

  1. कलाई, हाथ या ऊँगलियों में सुन्नता होना 
  2. झुनझुनी, 
  3. दर्द
  4. कमजोरी 
  5. वस्तुओं को पकड़ने में, उठाने में तकलीफ होना, हाथ से सामान का छूट जाना । रूग्ण अपना mobile phone  उठाने में भी असहाय महसूस करता है, key board typing में भी तकलीफ होने लगती है, steering wheel पकड़ने में भी परेशानी होने लगती है।

6. कार्पेल टनल सिन्ड्रोम यह धीरे-धीरे विकसित होनेवाली बीमारी है जो समय के साथ तकलीफदेह होते जाती है। प्रारंभावस्था में केवल मामूली लक्षण महसूस होते हैं, जो समय  के साथ बढ़ते जाते हैं। लोग आमतौर पर रात में सबसे पहले लक्षणों को नोटिस करते हैं। दर्द या झुनझुनी से नींद खुलने लगती है।

निदान:- चिकित्सक लक्षणों के आधार पर परीक्षण करता है और कुछ आवश्यक जाँच करवाता है-

  • EMG-Electromyography
  • NCS-Nerve conduction studies
  • X-ray
  • MRI
  • Blood test – मधुमेह, थायरॉइड, वसा संबंधित रोग, विटामिन्स और कैल्शियम की कमी से होनेवाले रोग।

चिकित्सा:- 

  1. हाथ को आराम देना।
  2. बर्फ से सिंकाई करना।
  3. कलाई में splint बाँधना विशेष रूप से रात में सोते समय।
  4. शारीरिक व्यायाम – कार्पेल टनल सिन्ड्रोम में व्यायाम करना बहुत महत्वपूर्ण है। कुछ विशेष व्यायाम इस व्याधि के लक्षणों की तीव्रता कम करते है। लेकिन इन व्यायाम को बहुत धीरे-धीरे शुरू करें और धीरे-धीरे व्यायाम की आवृत्ति और अवधि को बढ़ाते जाएँ। व्यायाम के पूर्व हाथ को गर्म पानी में कुछ समय डालें, जिससे रक्त संचरण बढ़कर व्यायाम के लायक पेशी बन जाती है। ध्यान रखें कि हाथ को झटका या दबाव न दें।


  • Stretching Exercises
  • Strengthening Exercises
  • Range of Motion Exercises 
  • Yoga
  1. दर्द और सूजन कम करनेवाली औषधियाँ।
  2. ऊपरी उपायों से आराम न मिलने पर अस्थितज्ञ डॉक्टर corticosteroid का कलाई में इन्जेक्शन लगाते हैं।
  3. इन सारे उपायों के करने के बाद भी यदि कार्पल टनल सिन्ड्रोम के लक्षणों की तीव्रता बढ़ते जाती है तो आखिरी उपाय के रूप में शल्य चिकित्सा की जाती है।
  4. मधुमेह आदि व्याधियों में नियंत्रण करना ।

उपद्रव :- 

  1. स्थाई Nerve damage होना।
  2. muscle astrophy होना।
  3. कलाई की पकड़ने की क्षमता में कमी आ जाना ।
  4. स्थाई रूप से कलाई में दर्द का बने रहना।

ध्यान देने योग्य बातें:-

  • कलाई में होनेवाली सुन्नता, दर्द, झुनझुनी होने पर तुरंत अपने डॉक्टर से चेक करवायें। नियमित व्यायाम करें।

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डॉ. के पी कौशिक

आनुवंशिक मांसपेशी विकार Genetic Muscle Disorder