Irritable Bowel Syndrome (IBS) इर्रिटेबल बावेल सिंड्रोम
मल के वेग को नियमित रूप से त्याग करना निरोगी शरीर के लिए हितकारी है क्योंकि नियमित मल त्याग होने से मन शांत रहता है। दिन भर सक्रियता, स्फूर्ति रहती है, कार्य में मन लगता है, एकाग्रता रहती है । पेट की विभिन्न समस्याएँ, अनेकानेक कारणों से हो सकते है। पेट में गड़बड़ी, मरोड़, एसिडिटी, कब्ज, गैस बनना, अपच इत्यादि अति सामान्य समस्याएँ है। इनमें से ग्रहणी (इरिटेबिल बॉवेल सिन्ड्रोम) सबसे सामान्य है।
मानसिक तनाव जिम्मेदार
काल के प्रवाह में एकत्रित होनेवाली अचेतन मन की उलझनें तनाव के रूप में हाईपोथेलेमस के जरिये पाचन संस्थान पर असर कर आईबीएस का रूप धारण करती हैं। आई. बी. एस. नाम की तकलीफ होने की संभावना वाले रोगी बेचैन, अति संवेदनशील, भयभीत और चिंतित होते हैं।
आई.बी.एस की समस्याएं शारीरिक रोग के कारण न होकर आंतरिक कारणों से होती है। संभवतः लक्षण आंतों के अतिसंवेदनशील होने के कारण होते हैं। बदपरहेजी, तनाव, चिंता, जीवन अव्यस्थित होने इत्यादि कारणों से विविध लक्षण विभिन्न गंभीरता में हो सकते है। अनेक व्यक्तियों के साथ चिंता, घबराहट, भयभीत रहने की समस्याएँ और बिना शारीरिक रोग के कारण विभिन्न लक्षणों-सिरदर्द, पैर दर्द, बदन दर्द, कमजोरी, पेशाब बार-बार होने की इच्छा, अपचन, पीठ दर्द, महिलाओं में मेनसेज में दर्द इत्यादि लक्षण भी हो सकते हैं।
लक्षण – I.B.S. से ग्रस्त भिन्न-भिन्न रुग्ण एक जैसी शिकायत नहीं करते, बल्कि हर मरीज में पाचन से संबंधित भिन्न लक्षण होते हैं। I.B.S. के लक्षणों में विभिन्न स्वरूप हो सकते हैं।
पेट दर्द, पेट का फूलना, पेट का पूरी तरह साफ न होने का हमेशा एहसास होना व इससे चिंतित होना और बेचैनी इस व्याधि के मुख्य लक्षण हैं। हालांकि अलग-अलग व्यक्ति के लक्षणों में भिन्नता रहती है। कुछ रोगियों को आंव के साथ मल प्रवृत्ति तथा किसी-किसी को अतिसार की शिकायत रहती है। इसमें रोगी के मल से रक्त नही निकलता रोगी में कुछ समय के लिए लक्षण दिन प्रतिदिन बढ़ते जाते हैं।
दस्त और कब्ज – इसमें मरीज कुछ दिनों तक कब्जग्रस्त होते हैं, कुछ दिन हाजत महसूस नहीं होती या कड़ा होता है। पेट साफ नहीं होने की अनुभूति के बाद अचानक किसी दिन पतले दस्त कई बार हो जाते हैं। इनको भोजन के बाद भी मलत्याग की इच्छा होती है। पहले इनको पेट के निचले हिस्से में दाहिनी या बायीं तरफ मरोड़ के साथ पेट दर्द होता है फिर मल त्याग के बाद राहत मिल जाती है। यह चक्र चलता रहता है।
घबराहट के कारण दस्त – इन मरीजों में भोजन के पश्चात् या हल्का तनाव, चिंता होने पर भी मल त्याग की इच्छा होती है। पहले दस्त के साथ ही पेट में हल्का मरोड भी हो सकता है।
कब्ज – कुछ मरीजों में कब्ज की प्रधानता होती है। इन्हें रोजाना मल त्याग नहीं होता, कड़ा होता है, साफ नहीं होता।
अपचन – इन व्यक्तियों में कुछ भोजन तत्वों से विशेष रूप से संवेदनशीलता होती है। इन्हें भोजन सेवन करने के बाद पेट फूलने, गैस बनने, पेट में हल्की मरोड़, डकारें, दस्त आदि हो सकते हैं।
अन्य व्यक्तियों में लक्षण विभिन्न रूप से मिले जुले हो सकते हैं। तनाव, चिता, भोजन में बदपरहेजी, ठंडा-गरम या गरिष्ठ भोजन, मिर्च मसाले सेवन, ज्यादा मात्रा में कॉफी या चाय पीने से यह लक्षण बढ़ सकते हैं। अध्ययन से ज्ञात हुआ है कि इस व्याधि से ग्रस्त महिलाओं में मासिक धर्म के समय अपचन संबंधी लक्षण अधिक दिखते हैं। इससे स्पष्ट होता है कि हार्मोन्स की वजह से लक्षण बढ़ते हैं। साथ ही ऐसे रुग्ण मानसिक तनाव व अवसाद से ग्रस्त रहते हैं।
आई. बी. एस. के लक्षणों को 3 वर्गों में विभाजित किया गया है।
1. कब्ज संबंधी, 2. अतिसार संबंधी, 3. कब्ज तथा अतिसार दोनों से संबंधित
उदरशूल महत्वपूर्ण लक्षण है। अन्न उदरशूल को उत्तेजित करता है और मल त्याग के बाद उदरशूल कम हो जाता है।
शोधकर्ता अब तक इसका कारण ज्ञात नहीं कर पाए है। अध्ययन के द्वारा पाया गया है कि कुछ रुग्णों की बड़ी आंत विशेष प्रकार के आहार के प्रति अति संवेदनशील होती है। मानसिक तनाव से ग्रस्त रुग्णों में भी आई.बी.एस. के लक्षण मिलते हैं।
इसमें रुग्ण की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। इसके रुग्ण की बड़ी आंत की गति सामान्य नहीं रहती, बल्कि कम-ज्यादा होती रहती है।
रोग निदान (Diagnosis)
आई.बी.एस. के निदान के लिए किसी प्रकार की जांच नहीं है। केवल रुग्ण के पूर्ण इतिहास व लक्षणों की जानकारी के आधार पर ही निदान होता है। आई बी एस की समस्याएँ किसी रोग के संकेत नहीं मिलते। इस रोग में रुग्ण वैद्य भी अमीबियासिस, एसिडिटी, अल्सर से भ्रमित रहते है जबकि लक्षणों के आधार तथा जाचों को पूर्णतः सामान्य होने पर मरीज आई. बी.एस. ग्रसित माने जाते है।
- जब लक्षण तीन माह से ज्यादा लगातार या बार-बार होते है।
- पेट दर्द होता है जिससे मल त्याग से राहत मिलती है।
- मल कई बार करना पड़ता है अथवा मुलायम पतला अथवा कड़ा होता है।
- करीब एक चौथाई दिनों में दिन में कई बार मल त्याग की हाजत होती है अथवा कड़ा होता है।
- मल के साथ आंव आती है। पेट फूलता है।
अन्य बीमारियों का पता लगाने के लिए रक्त परीक्षण के द्वारा मधुमेह, गुर्दे और यकृत के कार्यों की जांच और मल की जांच की जा सकती है। कुछ लोगों में गेस्ट्रोइंटेस्टानइल ट्रैक को जांचने के लिए अपर और लोअर स्कोप्स (Gastro Colono Scopy) का उपयोग किया जाता है।
उपचार – आई.बी.एस. की तकलीफ को शीघ्रातिशीघ्र ठीक करने के लिए भोजन, पाचन, व्यायाम, दिनचर्या और नींद को समायोजन करना आवश्यक है। अत्यधिक मानसिक तनाव को भी टालना चाहिए। उसी तरह आई.बी.एस. की तकलीफ बढ़ाने वाले तत्व के अलावा भोजन के कुछ पदार्थ टालना जरूरी है। यह रोग आपके आहार और जीवन शैली में परिवर्तनों को प्रशासित करके नियंत्रित किया जा सकता है। कुछ को परामर्श और दवा की भी आवश्यकता होती है।

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