दिवाली के बाद डिटॉक्सिफिकेशन

खूब मिठाई, पकवान खाने के बाद बॉडी को कैसे करें डिटॉक्स

भारत में त्योहार का मतलब है पकवान और मिठाई। दिवाली में तो तरह-तरह की मिठाइयां और पकवान बनते हैं। लड्डू, नमकीन, पूड़ी और कचौड़ी के लिए ना-ना करते हुए भी काफी कुछ खा लेते हैं।

यही स्वादिष्ट खाना-पीना कई बार पेट पर भारी पड़ जाता है। कभी अपच, कभी गैस तो कभी थकान महसूस होती है। दरअसल इन दिनों शरीर में ज्यादा शुगर, मैदा और तेल इकट्ठा होकर टॉक्सिन की तरह असर करने लगते हैं।

ऐसे में जरूरी है कि हम त्योहार की खुशियां तो मनाएं, लेकिन बाद में शरीर को थोड़ा आराम दें और डिटॉक्स करें।

इसलिए ‘जरूरत की खबर’ में आज बॉडी डिटॉक्स की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-

  • भोजन और ड्रिंक्स में क्या बदलाव करने होते हैं?
  • डिटॉक्सिफिकेशन में क्या सावधानियां बरतनी होती हैं?

सवाल- डिटॉक्सिफिकेशन का मतलब क्या है और दिवाली के बाद ये क्यों जरूरी है?

जवाब- डिटॉक्सिफिकेशन यानी शरीर से उन हानिकारक पदार्थों को बाहर निकालना, जो हमारे खानपान या लाइफस्टाइल की वजह से जमा हो जाते हैं। दिवाली में हम ढेर सारी मिठाइयां, तला हुआ खाना खाते हैं। ये चीजें शरीर में टॉक्सिन्स बढ़ाती हैं, जिससे पाचन तंत्र खराब होता है। ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर का बैलेंस बिगड़ता हैं और थकान महसूस होती है।

डिटॉक्स करने से लिवर, किडनी और पेट को राहत मिलती है। ये प्रक्रिया शरीर को साफ करती है, इम्यूनिटी बढ़ाती है और त्वचा को चमक देती है। अगर डिटॉक्स न किया जाए तो इसके कारण वेट गेन और पाचन की समस्याएं हो सकती हैं। दिवाली के बाद डिटॉक्स शरीर को रीचार्ज करने का सबसे आसान तरीका है। शरीर का एक नेचुरल डिटॉक्स सिस्टम होता है। लिवर और किडनी टॉक्ससीन्स को फ़िल्टर करते हैं। ये टॉक्ससीन्स पसीना यूरिन और मल के जरिये बाहर निकलते हैं। एन्टीऑक्ससिडेंट रिच फ़ूड और गुड स्लीप इस प्रोसेस में मदद करते हैं।

सवाल- डिटॉक्स के लिए लाइफस्टाइल में क्या बदलाव करें?

जवाब- डिटॉक्स सिर्फ खाने तक सीमित नहीं है, पूरी दिनचर्या बदलनी पड़ती है। सबसे जरूरी है 10-12 गिलास पानी पीना, क्योंकि ये टॉक्सिन्स को यूरिन और पसीने से बाहर निकालता है। रोज 30-45 मिनट की हल्की एक्सरसाइज जैसे वाक, योग या स्ट्रेचिंग करें, इससे मेटाबॉलिज्म तेज होता है।

नींद बहुत जरूरी है- 8 घंटे की भरपूर नींद लें, क्योंकि नींद में लिवर और ब्रेन सबसे तेजी से खुद को रिपेयर करते हैं। एक घंटे की भी अतिरिक्त नींद सुपरडिटॉक्स की तरह काम करती है। मेडिटेशन या डीप ब्रीदिंग से स्ट्रेस कम होता है, क्योंकि तनाव टॉक्सिन्स बढ़ाता है। इस दौरान स्मोकिंग और शराब से पूरी तरह दूरी बनाएं।

सवाल- डिटॉक्स में कौन सी चीजें खानी चाहिए?

जवाब- डिटॉक्स में हल्का खाना, फाइबर और प्रोबायोटिक्स से भरपूर खाना लें। फल जैसे सेब, पपीता और केला एनर्जी देते हैं और पचने में आसान हैं। सब्जियां जैसे ब्रॉकली, पालक, चुकंदर और गाजर एंटीऑक्सिडेंट्स से भरपूर हैं।

प्रोबायोटिक्स के लिए दही और छाछ लें, जो गुड बैक्टीरिया बढ़ाते हैं। लहसुन, प्याज और अदरक पाचन को बेहतर करते हैं। ग्रीन टी और हर्बल टी जैसे तुलसी या दालचीनी की चाय से एंटीऑक्सिडेंट्स मिलते हैं। प्रोटीन वाली चीजें जैसे मूंग दाल या सोयाबीन खाएं। इस दौरान अधिक तेल और मसाले अवॉइड करें।

सवाल- नींबू और लहसुन डिटॉक्स में इतने फायदेमंद क्यों माने जाते हैं?

जवाब- नींबू में विटामिन-C और एंटीऑक्सिडेंट्स होते हैं, जो लिवर को डिटॉक्स करने और इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करते हैं। सुबह एक गिलास गुनगुने पानी में नींबू निचोड़कर पीने से पाचन सुधरता है और टॉक्सिन्स बाहर निकलते हैं। लहसुन में सल्फर कंपाउंड्स और एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं, जो ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करते हैं और लिवर को साफ करने में मदद करते हैं। इसे सलाद में कच्चा या सब्जी में पकाकर खा सकते हैं। दोनों मिलकर शरीर की इंफ्लेमेशन कम करते हैं और पाचन को दुरुस्त रखते हैं। हालांकि, इन्हें संतुलित मात्रा में ही खाएं।


सवाल- डिटॉक्स के दौरान क्या सावधानियां जरूरी हैं?

जवाब- डिटॉक्स करते समय बैलेंस बनाए रखें। अगर डायबिटीज, हाइपरटेंशन या कोई और बीमारी है तो पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें। दिन में एक-दो नींबू खाना पर्याप्त है। लहसुन ज्यादा खाने से गैस हो सकती है। इसलिए 2-3 कलियां ही खाएं। एक्सरसाइज हल्की रखें, बहुत एक्सरसाइज करने से थकान और कमजोरी हो सकती है। अगर चक्कर, कमजोरी या उल्टी जैसे लक्षण दिखें तो प्लान रोककर डॉक्टर से मिलें। बच्चों, बुजुर्गों या प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए माइल्ड प्लान चुनें। डिटॉक्स का मतलब भूखा रहना नहीं है, बल्कि हल्का और हेल्दी खाना है। इसलिए भूखे न रहें, हेल्दी और बैलेंस्ड खाना खाएं।

सवाल- डिटॉक्स के दौरान कौन सी चीजें खाने से बचना चाहिए?

जवाब- डिटॉक्स के दौरान ऐसी चीजों से दूर रहें, जो पेट पर बोझ डालें या टॉक्सिन्स बढ़ाएं। मिठाइयां, तला हुआ खाना, मैदा, ज्यादा नमक, शराब और कैफीन वाली चीजें जैसे चाय-कॉफी अवॉइड करें। प्रोसेस्ड फूड जैसे चिप्स, बिस्किट और कोल्ड ड्रिंक्स भी न लें, क्योंकि इनमें शुगर और केमिकल्स होते हैं, जो लिवर पर स्ट्रेस डालते हैं। ज्यादा स्टार्च वाले फूड जैसे आलू या व्हाइट ब्रेड भी कम करें, क्योंकि ये ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ाते हैं। डॉ. गौरव जैन कहते हैं कि डिटॉक्स के दौरान हल्के और नेचुरल फूड्स पर फोकस करें, ताकि शरीर को आराम मिले।

सवाल- क्या ब्रेन को डिटॉक्स करना भी जरूरी है?

जवाब- बिल्कुल, दिवाली में ज्यादा खाने से हॉर्मोनल बैलेंस बिगड़ता है, जिससे चिड़चिड़ापन, तनाव या नींद की कमी हो सकती है। ब्रेन डिटॉक्स के लिए 10-15 मिनट मेडिटेशन या डीप ब्रीदिंग करें। ये दिमाग को शांत करता है और फोकस बढ़ाता है। एक घंटे की अतिरिक्त नींद ब्रेन को रिफ्रेश करती है। मोबाइल और स्क्रीन टाइम कम करें, ताकि मानसिक थकान कम हो। इससे न सिर्फ मूड बेहतर होता है, बल्कि अगले दिन के लिए एनर्जी भी बनी रहती है।

और ज्यादा जानकारी के लिए डॉक्टर के पी कौशिक से संपर्क करें। 

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