लिवर सिरोसिस का इलाज Liver Cirrhosis Treatment
लिवर सिरोसिस – जब हो जाए किसी को भी तो घबराएं नहीं, इलाज है न
अगर बात करें सिरोसिस लिवर कि तो आपको बता दें कि यह एक गंभीर स्थिति है, जिस में लिवर की कोशिकाएं धीरे-धीरे नष्ट होने लगती हैं और उन की जगह रेशेदार ऊतक ले लेता है।
अगर कोई भी घर का सदस्य गंभीर रूप से बीमार हो जाए जैसे उस का लीवर ख़राब हो जाए, तो घर के सदस्यों के लिए मुश्किलों का पहाड़ खड़ा हो जाता है। घर में बीमारी आ गई है तो आप कहीं आजा नहीं सकते, खाना भी घर में बीमारों वाला बनने लगता है। पैसे कम हों तो हाल और भी बुरा हो जाता है।
अगर बात करें सिरोसिस लिवर कि तो आपको बता दें कि यह एक गंभीर स्थिति है, जिस में लिवर की कोशिकाएं धीरे-धीरे नष्ट होने लगती हैं और उन की जगह रेशेदार ऊतक ले लेता है। यह प्रक्रिया लिवर की कार्यक्षमता को प्रभावित करती है और अगर समय पर इलाज न किया जाए, तो यह जानलेवा भी साबित हो सकती है।
सिरोसिस होने पर लिवर शरीर से विषैले पदार्थों को ठीक से बाहर नहीं निकाल पाता, जिस से शरीर में कई जटिलताएं पैदा हो सकती हैं। ऐसे में पूरे घर की जिंदगी मानो रुक सी जाती है।
अगर मान लीजिये घर में आपकी पत्नी को ये बीमारी हो गई हो तो इस बीमारी को कैसे डील करें, जानिए :
बीमारी के बारे में डाक्टर से पूरी जानकारी लें।
बीमारी चाहे कैंसर की हो, लिवर की हो या फिर चाहे जो भी हो वह अपने साथ बहुत सारी परेशानी और मानसिक तनाव ले कर आती है। लेकिन ज्यादा तनाव तब होता है जब बीमारी के बारे में पता न हो।
इसलिए डाक्टर से इलाज की प्रक्रिया, साइड इफैक्ट्स और रिकवरी के समय के बारे में स्पष्ट बात करें। कुछ ऐसे लोगों से भी बात करें जो इस बीमारी से जूझ कर आगे बढ़े हों। इस से आप को बीमारी में होने वाली दिक्कतों का सामना कैसे करें यह भी पता चलेगा और हिम्मत भी मिलेगी।
घर के कामकाज को संभालने के लिए कोई इंतजाम करें
यह सोचना कि आज मां आई हैं, कल बहन आ जाएगी और फिर बच्चे भी थोड़ा बहुत संभाल लेंगे, तो यह सही अप्रोच नहीं है। यह बीमारी लंबी चलने वाली है। इसलिए रैगुलर कोई इंतजाम करें। घर के कामों के लिए कोई हेल्पर रख लें।
खाना बनाने के लिए किसी को रखें क्योंकि लीवर की बीमारी में उन्हें अलग तरह की डाइट की जरूरत होती है जोकि उन के स्वास्थ्य के लिए ठीक हो।
बच्चों की पढाई-लिखाई जो आज तक आप की बीवी देखती आ रही थी, अब उन के लिए यह सब देखना संभव नहीं है। इसलिए इस के लिए या तो किसी ट्यूशन का इंतजाम करें या फिर बच्चों को पढ़ाने का काम आप खुद करें।
मैडिकल मैनेजमेंट संभालें
दवाओं का समय, रिपोर्ट्स का रिकौर्ड और डाक्टर की अपोइंटमैंट का शैड्यूल खुद मैनेज करें।
अगर किसी दूसरे डाक्टर से भी सैकंड ओपिनियन लेनी हो, तो उस के लिए भी सारी रिपोर्ट तैयार रखें।
परिवार से हैल्प लें
अगर आप मुश्किल में हैं और कुछ समझ नहीं आ रहा कि घर और पत्नी को अब कैसे संभालें, तो परेशान होने के बजाय अपने रिश्तेदारों से मदद लें। दोस्त और अन्य लोगों से पता करें कि किसी को कोई अच्छा डाक्टरी अनुभव हो तो वे सहायता करें। पत्नी को समझाने के लिए उन की बहन या माता-पिता को बुलाएं जो उन्हें बताएं कि बीमारी कोई भी हो लेकिन हिम्मत हारना किसी समस्या का हल नहीं है।
पत्नी को इमोशनली सपोर्ट करें
पत्नी की बीमारी का सामना करना एक पति के लिए काफी मुश्किल होता है। पत्नी के बीमार होने से पूरा घर बिखरने लगता है, जिसे संभालना पति को ही है। इसलिए कई बार वह चिड़चिड़ाने लगता है।
लेकिन चाहे कुछ भी हो पत्नी को यह कभी नहीं लगना चाहिए कि आप परेशान हो रहे हैं। उस से हमेशा पौजिटिव ही बोलें। उस की बातों से अलसाएं नहीं, बल्कि उस से खूब बातचीत करें। उसे समझाने की कोशिश करें।
बीवी का दर्द बाँटें। उसे सहारा दें। कभी-कभी उस का हाथ पकड़ कर बैठ जाएं, पुरानी यादें ताजा करें।इस से वह कुछ देर के लिए ही सही अपना गम भूल सकती है।
बाहर कैसे ले जाएं बीमार पत्नी को
अगर पत्नी बीमार है और बाहर जाने लायक नहीं है तो अलग बात है लेकिन अगर किसी दिन उसे ठीक लग रहा है तो उसे बाहर ले कर जाएं। किसी शादी वगैरह में भी अगर डाक्टर कहता है तो ले जाएं। लेकिन उस का खाना घर से ही ले जाएं।
यहां आप इस के लिए भी तैयार रहें कि जब आप पत्नी को बाहर ले जाएंगे तो लोग सहानभूति दिखाएंगे कि क्या हुआ? कैसे हुआ?
मरीज की डाइट पर ध्यान दें
घर का बना ताजा और सादा खाना ही दें। बाहर का खाना या सलाद आदि से इन्फैक्शन का खतरा बढ़ जाता है। डाक्टर से डाइटचार्ट बनवाएं और उसी के अनुसार खाने को दें। नमक और पानी कितना देना है इस बात का भी ध्यान रखें। अगर डाक्टर के कहे अनुसार सही ढंग से डाइट ली जाए तो बीमारी से रिकवर होने के चांस ज्यादा होते हैं।
ट्रांसप्लांट करवाने पर बातचीत करें
कई बार बीमारी इतनी बढ़ जाती है कि वह लास्ट स्टेज पर पहुंच जाती है। ऐसे में डाक्टर आप को लीवर ट्रांसप्लांट की सलाह देते हैं क्योंकि इस के आलावा कोई औप्शन नहीं होता है। इस के लिए अस्पताल के ट्रांसप्लांट को-आर्डिनेटर से बात करें। परिवार में ब्लड डोनर की उपलब्धता और प्रक्रिया के खर्च के बारे में जानकारी जुटाएं।
लिविंग डोनर : परिवार का कोई सदस्य (पति, भाई-बहन, बच्चे) अपने लिवर का एक हिस्सा दान करता है। लिवर की खासियत यह है कि यह डोनर और मरीज दोनों के शरीर में कुछ ही हफ्तों में वापस अपने पूर्ण आकार में बढ़ जाता है। इस के लिए ब्लड ग्रुप मैच होना जरूरी है।
डिसीज्ड डोनर : किसी ब्रेन डेड व्यक्ति का लिवर प्राप्त करना। इस के लिए आप को अस्पताल और सरकारी वेटिंग लिस्ट में नाम दर्ज कराना पड़ता है।
हैल्थ इंश्योरेंस को देखें
कैशलेस सुविधा : जांचें कि आप के शहर के कौन से बड़े लिवर स्पैशलिस्ट अस्पताल आप की पौलिसी के पैनल में हैं।
वेटिंग पीरियड : लिवर की पुरानी बीमारियों के लिए इंश्योरैंस में अकसर वेटिंग पीरियड होता है। क्लौज चैक करें।
ट्रांसप्लांट कवर : यदि डाक्टर ने ट्रांसप्लांट की सलाह दी है, तो पूछें कि क्या आप की पौलिसी डोनर के औपरेशन का खर्च भी उठाएगी।
सरकारी योजनाओं का लाभ उठाएं
आयुष्मान भारत : यदि आप इस के पात्र हैं, तो 5 लाख तक का मुफ्त इलाज मिल सकता है।
मुख्यमंत्री राहत कोष : गंभीर बीमारियों के लिए राज्य सरकारें आर्थिक मदद देती हैं। इस के लिए आप को अस्पताल से इस्टीमेट लेटर ले कर विधायक या सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय में आवेदन करना होता है।
राष्ट्रीय आरोग्य निधि : बीपीएल परिवारों के लिए केंद्र सरकार की इस योजना के तहत बड़े सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए मदद मिलती है।
लिवर की बीमारी में काफी पैसा लग जाता है। एक सामान्य परिवार के लिए इतना पैसा इकट्ठा करना लगभग असंभव सा हो जाता है। मगर कोशिश करने से ही सफलता मिलती है। इसलिए जहां तक संभव हो पैसे जुटाने की कोशिश करें।

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