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Showing posts from October, 2025

Restless Leg Syndrome (रेस्टलेस लेग सिंड्रोम)

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जब भी किसी के पैरों में दर्द होता है तो सबसे पहले लोगों के मन में यही ख्याल आता है कि यह कैल्शियम की कमी के कारण होने वाला मामूली दर्द है, लेकिन हमेशा ऐसा नहीं होता। इसलिए जब भी पैरों में दर्द हो, इस बात पर गौर करें कि रात को सोते समय दर्द के साथ कहीं आपके पैरों में खिंचाव या कंपन तो महसूस नहीं होता? अगर ऐसे लक्षण नजर आएं तो इसे केवल ऑस्टियोपोरोसिस या आर्थराइटिस की वजह से होने वाला दर्द समझकर नजरअंदाज न करें। कई बार न्यूरोलॉजिकल समस्या की वजह से भी ऐसी दिक्कतें नजर आती हैं। आज की महिला का जीवन घर-परिवार और ऑफिस की जिम्मेदारी निभाते हुए अति व्यस्त हो गया है। इसी व्यस्तता के कारण वह अपने स्वास्थ्य की अपेक्षित देखभाल नहीं कर पाती। असमय खानपान, व्यायाम का अभाव, पर्याप्त नींद न लेना, आहार में पोषक तत्वों की कमी, तनावग्रस्त जीवन इत्यादि कारणों से वह अनेक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रही है। आज अधिकांश महिलाओं की शिकायत है ’पैरों में दर्द’। सामान्य-सी तकलीफ समझा जाने वाला पैरों का दर्द अनेक कारणों से होता है। उनमें से एक कारण है ’’रेस्टलेस लेगस सिन्ड्रोम’’ (RLS)। आइए, इसकी विस्तृत जानकारी...

रीढ़ के विकार (Spinal Disorders)

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आजकल रीढ़ के विकार (Spinal Disorders) से ग्रस्त रोगी अधिक हो गए हैं। विशेषतः युवा वर्ग भी। आधुनिक चिकित्सा के सभी उपाय जैसे पेन किलर, स्टेराइड, कैल्शियम, फिजियोथेरेपी लेकर आते हैं। आधुनिकता की दौड में हम परिश्रम से दूर होकर यांत्रिक जीवन जीने लगे हैं। हमारे लगभग हर कार्य में मशीनों का प्रवेश हो गया है। चाहे चटनी बनाने या मसाले पीसने के लिए ग्राइंडर का या फिर कपड़े धोने के लिए वाशिंग मशीन का उपयोग हो, हमें ज्यादा हाथ-पैर हिलाने नहीं पड़ते। पहले महिलाएं सिलबट्टे पर चटनी पीसती थीं, मसाले भी हाथ से ही कूटे जाते थे। उन दिनों स्कूटर, बाइक, कार आदि का प्रचलन कम होने के कारण लोग पैदल अथवा साइकिल पर आवागमन करते थे। इन सब शारीरिक गतिविधियों के फलस्वरूप उनकी मांसपेशियां और हड्डियां सदैव सक्रिय एवं स्वस्थ रहती थी। अतिरिक्त व्यायाम के साथ ही पौष्टिक व संतुलित भोजन की ओर भी ध्यान दिया जाता था किंतु आज निष्क्रिय-सी हो चुकी दिनचर्या की वजह से हम विभिन्न रोगों को आमंत्रित कर रहे हैं। इनमें हमारी शरीर की प्रमुख अस्थि ’मेरूदंड’ अर्थात् रीढ़ के विकारग्रस्त हो जाने से कई समस्याएं भुगतनी पड़ती हैं। अतः इससे संबं...

फैटी लिवर Fatty Liver

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  यदि कोई रोगी दर्द से परेशान व विचलित हैं तो वह तुरंत चिकित्सा हेतु डॉक्टर के पास जाता है। लेकिन फैटी लिवर ऐसा रोग है जिसके शुरुवात में कोई लक्षण नहीं होते, दिखने में रोगी पूर्णतः स्वस्थ लगता है। खान-पान रहन-सहन सब कुछ नार्मल होता है। इतना ही नहीं इस रोग का निदान होने पर भी लोग इसे हल्के में लेते हैं क्योंकि कोई तकलीफ ही नहीं होती।  दरअसल इस बीमारी का तो पता तब चलता है जब किसी अन्य कारण के लिए सोनोग्राफी की जाती है  हमारे शरीर की महत्वपूर्ण ग्रथि यकृत अर्थात लिवर है। लिवर से शरीर में ब्लडशुगर, विषैले तत्व और कोलेस्ट्राल नियंत्रित होते है। लकिन अधिक चर्बी जमने से फैटी लिवर की समस्या हो जाती है। इस लिवर में कुछ प्रतिशत फैट रहता ही है। 5 प्रतिशत से ज्यादा फैट जमा हुआ तो वह फैटी लिवर कहलाता है। फैट जमा होने पर भी रोगी को किसी प्रकार का कष्ट नहीं होता पर लंबे समय तक फैट रहने पर लिवर सिरोसिस अर्थात लिवर सिकुड़ जाता है, विकृत हो जाता है, जिससे शरीर की  पाचन  क्रिया प्रभावित होती है।  जिस तरह मोटे होने पर हमारे शरीर के बाकी हिस्सों पर चर्बी चढ़ जाती है, ठीक उसी तर...

Irritable Bowel Syndrome (IBS) इर्रिटेबल बावेल सिंड्रोम

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मल के वेग को नियमित रूप से त्याग करना निरोगी शरीर के लिए हितकारी है क्योंकि नियमित मल त्याग होने से मन शांत रहता है। दिन भर सक्रियता, स्फूर्ति रहती है, कार्य में मन लगता है, एकाग्रता रहती है । पेट की विभिन्न समस्याएँ, अनेकानेक कारणों से हो सकते है। पेट में गड़बड़ी, मरोड़, एसिडिटी, कब्ज, गैस बनना, अपच इत्यादि अति सामान्य समस्याएँ है। इनमें से ग्रहणी (इरिटेबिल बॉवेल सिन्ड्रोम) सबसे सामान्य है। वर्तमान में अव्यवस्थित जीवनचर्या के फलस्वरूप असमय खान-पान, देर रात तक जागना, सुबह देर से उठना, बढ़ता हुआ मानसिक तनाव, व्यसन के अधीन होना तथा प्रतियोगिता के वातावरण में मानसिक तनाव से ग्रस्त होने से व्यक्ति के स्वास्थ्य का स्तर दिन-प्रतिदिन गिरता जा रहा है। अनेक प्रकार की व्याधियों ने इंसान को अपनी चपेट में लिया है। पेट से संबंधित अनेक बीमारियां भी आम तौर पर पाई जा रही है। आहार की अशुद्धता के कारण भी हमें पेट की तकलीफों का सामना करना पड़ रहा है। पाचन संस्थान के रोगों में सबसे अधिक दिखाई देने वाले रोगों में अम्लपित्त, आमाशय का घाव, ग्लोबस हिस्टीरिकस (Lump in throat), अल्सरेटिव कोलायटिस और आई.बी.एस. ह...